और भी सशक्त होगा भगवती अस्पताल, शताब्दी अस्पताल में भीड़ होगी कम!

बोरिवली के भगवती अस्पताल के पुनर्विकास के दूसरे चरण के लिए महापौर विश्वनाथ महाडेश्वर के हाथों भूमिपुजन किया गया।

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बोरिवली का भगवती अस्पताल कभी मुंबई उपनगरों में रहनेवालो के लिए सबसे बड़ा सरकरी अस्पताल होता है। किसी भी शख्स को किसी भी तरह की दवाईयों या फिर इलाज की जरुरत होती थी तो वही सीधा बोरिवली के भगवती अस्पताल में ही आता था। लेकिन समय के साथ साथ ये अस्पताल भी पूराना होता चला गया और इसे मरम्मत की जरुरत पड़ने लगी।  अस्पताल को कुछ समय के लिए बंद भी रखा गया था। भगवती अस्पताल को बंद होने के कारण उपनगरों में रहनेवाले ज्यादातर लोग कांदिवली के शताब्दी अस्पताल में इलाज कराने के लिए जाने लगे।  जिससे शताब्दी अस्पताल में मरीजों की संख्या को बोझ बढ़ने लगा।


हालांकी अब शताब्दी अस्पताल से मरीजों की संख्या का बोझ कम हो सकता है।  बोरिवली के भगवती अस्पताल के पुनर्विकास के दूसरे चरण के लिए महापौर विश्वनाथ महाडेश्वर के हाथों भूमिपुजन किया गया। संशोधित अस्पताल में 490 बेड की क्षमता होगी। अस्पताल का पुनर्विकास अभी वर्षों से लंबित है और इसे पूरा होने में तीन साल और लगेंगे। नए भवन में आठ मंजिलें होंगी और इसकी लागत लगभग  500 करोड़ होगी। साल 2013 में भगवती अस्पताल के प्रशासन ने उच्च सतर्कता विभाग के मरीजों के साथ साथ कर्मचारियों को भी कांदिवली के शताब्दी अस्पताल में भेज दिया था। 

और भी आधूनिक होगा अस्पताल

दूसरे चरण में, भगवती अस्पताल में चिकित्सा, सर्जरी, आर्थोपेडिक, बाल रोग और नेत्र विज्ञान जैसे विभाग होंगे। नफ्रोलॉजी, डायलिसिस, गैस्ट्रोएंटरोलॉजी मेडिसिन, गैस्ट्रोएंटरोलॉजी सर्जरी, बर्न, कार्डियोलॉजी और उनकी गहन देखभाल इकाइयों जैसी सुपर-स्पेशियलिटी जैसी सुविधा भी इस अस्पताल में होगी।  इसके साथ ही इस अस्पताल को एक नया रुप भी दिया जाएहा जिसे मरीजों को अस्पताल में थोड़ी और राहत मिल सके। 


भगवती अस्पताल के बारे में 
1962
में, हरिलाल भगवती ने सार्वजनिक अस्पताल के निर्माण के लिए BMC को एक प्लॉट दान किया और 50 बेड वाला अस्पताल 1968 में तैयार किया गया।  इस अस्पताल को उन्ही का ही नाम दिया गया। आखिरकार, अस्पताल की क्षमता 363 बेड तक बढ़ गई। 2009 में इसके पुनर्विकास की परिकल्पना की गई थी और इसके पहले चरण पर काम 2010 में शुरू हुआ था। अस्पताल का अधिकांश संचालन कांदिवली के शताब्दी अस्पताल में स्थानांतरित कर दिया गया।जुलाई 2016 में, पहला चरण पूरा हो गया था और आस-पास के भवन में 110-बेड वाला दवा विभाग शुरू किया गया था। हालंकी इन इमारतों में सिर्फ सर्दी, खांसी और हल्की बीमारियों का ही इलाज किया जाता था।  

बीएमसी में पेरिफेल अस्पतालों के प्रमुख डॉ. पी जाधव ने कहा, “माध्यमिक सेवाओं के अलावा, हम डायलिसिस, नेफ्रोलॉजी, गैस्ट्रोएंटरोलॉजी मेडिसिन और गैस्ट्रोएंटरोलॉजी सर्जरी और कैथ लैब जैसी सुपर स्पेशियलिटी सेवाएं प्रदान करने जा रहे , पश्चिमी उपनगरों में रहने वाले लोग बड़े पैमाने पर इससे लाभान्वित होंगे और यह केईएम जैसे हमारे अस्पतालों का भार उठाएगा।

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