फिल्म चलेगी या नहीं इसका मुझे जीरो फीसदी भी आयडिया नहीं है: श्रद्धा कपूर

फिल्म ‘स्त्री’ की अपार सफलता के बाद बॉलीवुड एक्ट्रेस श्रद्धा कपूर अब शाहिद के साथ फिल्म ‘बत्ती गुल मीटर चालू’ के लिए काफी एक्साइटेड हैं। श्री नारायण सिंह द्वारा डायरेक्टेड यह फिल्म बिजली की समस्या और फ्रॉड बिल जैसे गंभीर मुद्दे पर बनी है। श्री नारायण सिंह ने इससे पहले अक्षय कुमार के साथ ‘टॉयलेट – एक प्रेम कथा’ जैसी हिट फिल्म दी है। श्रद्दा कपूर ने फिल्म की रिलीज से पहले, एक खास मुलाकात में फिल्म और निजी जीवन के उतार चढ़ाव के विषय में खुलकर चर्चा की है।

  

स्त्री’ की सफलता ने आपके कॉन्फिडेंस को बढ़ाया?  

इस समय, मैं काफी अच्छा फील कर रही हूं। मेरे फिल्मी करियर की शुरुआत बहुत बड़े रूप में नहीं हुई है। मैं उसी समय से जानती हूं कि हिट और फ्लॉप इंडस्ट्री का हिस्सा हैं। हां पर जब लोग बोलते हैं कि आपकी फिल्म बहुत अच्छा कर रही है तो निश्चित तौर पर अच्छा तो लगता ही है। ये चीजें मुझे और भी मेहनत करने के लिए मोटिवेट करती हैं।

फिल्म को साइन करते वक्त आपके दिमाग में क्या रहता है? 

मैंने अब तक ऐसी ही फिल्में साइन की हैं, जिसके लिए मुझे 110 फीसदी वाली फीलिंग आई है, और मैंने उसके लिए अपना 110 फीसदी देने की कोशिश की है। पर यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर चलेगी या नहीं इसके बारे में मुझे जीरो फीसदी भी आयडिया नहीं है। मैं दर्शक की तरह ही उसके लिए रिएक्ट करती हूं। मेरे दायरे में जो मेरी एक्टिंग है, उसको मैं अपना बेस्ट देने की कोशिश करती हूं।

फिल्म मैं आपका किरदार कैसा है, साथ ही यह निजी जीवन से कितना मैच खाता है?

फिल्म का किरदार मेरे निजी जीवन से काफी अलग है। यही वजह है कि मुझे यह किरदार ज्यादा पसंद आया। फिल्म की यह लड़की थोड़ा लड़का टाइप है। उसके बोलने का तरीका भी काफी ठेट है। उसको लगता है कि वह विश्व की सबसे बेहतरीन फैशन डिजायनर है। पर उसका फैशन इससे उल्टा है। साथ ही इस किरदार के लिए मुझे गड़वाली बोली बोलनी पड़ी है जो कि यह मेरे लिए पहली बार था। इसको सीखने के लिए मैंने कुछ किताबें पढ़ी हैं। इस बोली को सीखना मेरे लिए काफी मुश्किल भरा रहा है।

 रियल लाइफ में कभी बत्ती गुल होने की समस्या का सामना किया है?

अब तो मुंबई में बिजली नहीं जाती है, पर जब मेरा बचपना था, उस समय इसका सामना किया है। बत्ती जाने के बाद मॉमबत्ती जलाकर भाई के साथ मस्ती करती थी और एक दूसरे को डराया करते थे। मुझे लगता है कि हर किसी ने बत्ती गुल का सामना किया होगा।

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