बॉम्बे हाई कोर्ट ने चर्चगेट में मुंबई यूनिवर्सिटी के मैडम कामा गर्ल्स हॉस्टल में पानी की भारी कमी का खुद से संज्ञान लिया है, जहाँ 100 से ज़्यादा छात्राएँ कथित तौर पर दो हफ़्ते से ज़्यादा समय से पानी की कमी से जूझ रही हैं।(Bombay High Court Takes Suo Motu Cognisance of Water Crisis at Mumbai University Girls Hostel)
बेसिक सुविधाओं की कमी
एक्टिंग चीफ़ जस्टिस रवींद्र घुगे और जस्टिस गौतम अंखड की एक डिवीजन बेंच ने हॉस्टल में बेसिक सुविधाओं की कमी को हाईलाइट करने वाली मीडिया रिपोर्टों पर ध्यान देने के बाद सोमवार को खुद से कार्रवाई शुरू की। कोर्ट ने इस मामले को स्टूडेंट्स की भलाई से जुड़ा एक गंभीर मुद्दा बताया।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, हॉस्टल में पानी की सप्लाई काफी नहीं हो रही है, जिससे स्टूडेंट्स को पीने का पानी मिलने में भी दिक्कत हो रही है। यूनिवर्सिटी ने कथित तौर पर इस कमी के लिए हॉस्टल परिसर के पास बृहन्मुंबई म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन (BMC) द्वारा किए जा रहे सिविक काम को जिम्मेदार ठहराया है।
हाई कोर्ट ने इस मुद्दे की जाँच में कोर्ट की मदद करने के लिए एडवोकेट युगंधरा खानविलकर को एमिकस क्यूरी नियुक्त किया है। उन्हें मामले की स्टडी करने और एक पिटीशन तैयार करने का निर्देश दिया गया है, जिसे 29 अगस्त तक जमा करना है। इसकी एक कॉपी संबंधित राज्य अधिकारियों को भी दी जाएगी ताकि वे संबंधित डिपार्टमेंट से निर्देश ले सकें। मामले की आगे की सुनवाई 2 सितंबर को तय की गई है।
कोर्ट का दखल स्टूडेंट हॉस्टल में रहने की बेसिक कंडीशन और लंबे समय से पानी की कमी से स्टूडेंट्स की हेल्थ, हाइजीन और रोज़मर्रा की ज़िंदगी पर पड़ने वाले असर को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच आया है।
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