मुंबई में कंजेशन टैक्स- अकेले चलानेवाले ड्राइवर कारों पर चार्ज लगाने की मांग

मुंबई के चुने हुए अधिकारियों ने ट्रैफिक कम करने और एयर क्वालिटी सुधारने के लिए बड़े बिज़नेस एरिया में कंजेशन फीस लगाने का सुझाव दिया है। इस प्रस्ताव ने कंजेशन प्राइसिंग को फिर से लोगों की चर्चा में ला दिया है, क्योंकि शहर में भारी गाड़ियों की आवाजाही और बढ़ते प्रदूषण लेवल का सामना करना पड़ रहा है।(Congestion Tax in Mumbai to Charge Solo-Driver Cars Revives Traffic and Pollution Debate in the City)

BJP नगरसेवक मकरंद नार्वेकर ने की मांग

यह मुद्दा कोलाबा से BJP पार्षद मकरंद नार्वेकर ने उठाया था, जिन्होंने बृहन्मुंबई म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन (BMC) कमिश्नर को लिखा था। अपने लेटर में, उन्होंने सिविक बॉडी से साउथ मुंबई के बिज़ी हिस्सों में आने वाली प्राइवेट गाड़ियों के लिए कंजेशन प्राइसिंग सिस्टम डिज़ाइन और टेस्ट करने को कहा। इन एरिया में फोर्ट, नरीमन पॉइंट और कोलाबा शामिल हैं। यह प्लान पीक ऑफिस आवर्स पर फोकस करता है, जब ट्रैफिक का प्रेशर सबसे ज़्यादा होता है।

हर एंट्री पर 50 से 100 रुपए के बीच चार्ज

प्रस्ताव के तहत, जिन प्राइवेट गाड़ियों में सिर्फ़ एक ड्राइवर होता है, उनसे कंजेशन फीस ली जाएगी। सुझाया गया चार्ज हर एंट्री पर 50 से 100 रुपए के बीच है। यह फीस सुबह के पीक आवर्स में सुबह 8 बजे से 11 बजे तक और शाम के पीक आवर्स में शाम 5 बजे से रात 8 बजे तक लागू होगी। इन टाइम स्लॉट के दौरान नोटिफाइड ज़ोन में आने वाली गाड़ियों से ऑटोमैटिकली चार्ज लिया जाएगा।प्लान में फीस कलेक्शन के लिए मौजूदा इंफ्रास्ट्रक्चर का इस्तेमाल करने का सुझाव दिया गया है। एंट्री पॉइंट पर CCTV कैमरे या ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन टेक्नोलॉजी के साथ FASTag सिस्टम लगाए जाएंगे। ये सिस्टम गाड़ियों की पहचान करेंगे और ट्रैफिक रोके बिना फीस काट लेंगे।

पब्लिक रिस्पॉन्स, टेक्निकल चुनौतियों और ओवरऑल फीजिबिलिटी का भी पता

पायलट से अधिकारियों को यह स्टडी करने में मदद मिलेगी कि सिस्टम ज़मीन पर कैसे काम करता है। इससे उन्हें शहर के दूसरे हिस्सों में इसे बढ़ाने पर विचार करने से पहले पब्लिक रिस्पॉन्स, टेक्निकल चुनौतियों और ओवरऑल फीजिबिलिटी का भी पता चल जाएगा।

इससे ट्रैफिक कंजेशन कम हो सकता है और गाड़ियों से होने वाला एमिशन कम हो सकता है। प्रस्ताव में कंजेशन प्राइसिंग के संभावित फाइनेंशियल असर पर भी रोशनी डाली गई है। अनुमान है कि ऐसी फीस से हर साल INR 200 करोड़ से INR 300 करोड़ के बीच कमाई हो सकती है। इस रेवेन्यू का इस्तेमाल उन प्रोजेक्ट्स को फंड करने के लिए किया जा सकता है जो एयर क्वालिटी में सुधार करते हैं और एनवायरनमेंट फ्रेंडली ट्रांसपोर्ट ऑप्शन को सपोर्ट करते हैं।

यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब मुंबई में हर साल गाड़ियों की संख्या में बढ़ोतरी हो रही है। इससे सड़कों पर दबाव बढ़ा है और एयर पॉल्यूशन और खराब हो गया है। कई एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग स्टेशनों ने समय के साथ खतरनाक या खतरे वाले पॉल्यूशन लेवल रिकॉर्ड किए हैं।

नारवेकर ने भारत के इकोनॉमिक सर्वे में हाल की सिफारिशों का भी जिक्र किया। सर्वे शहरी मोबिलिटी को मैनेज करने के एक टूल के तौर पर कंजेशन प्राइसिंग का सपोर्ट करता है।  यह रेफरेंस कार-फोकस्ड सिटी प्लानिंग से दूर एक बड़े पॉलिसी बदलाव को दिखाता है।

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