मुंबई- हाईकोर्ट ने धारावी के रीडेवलपमेंट का रास्ता साफ किया

बॉम्बे हाई कोर्ट ने धारावी कोलीवाड़ा इलाके को चल रहे धारावी रीडेवलपमेंट प्रोजेक्ट से बाहर रखने की मांग वाली पिटीशन को खारिज कर दिया है, ताकि रीडेवलपमेंट प्लान बिना किसी रुकावट के आगे बढ़ सके।(Mumbai HC Clears Path for Dharavi Redevelopment Rejects Koliwada Exclusion Plea)

रीडेवलपमेंट प्रपोज़ल को 2016 में ही मंज़ूरी

धारावी कोली जमात ट्रस्ट की तरफ से फाइल की गई पिटीशन में मांग की गई थी कि कोलीवाड़ा के ट्रेडिशनल मछुआरा कम्युनिटी सेटलमेंट को रीडेवलपमेंट की सीमाओं से अलग किया जाए। हालांकि, कोर्ट ने पाया कि रीडेवलपमेंट प्रपोज़ल को 2016 में ही मंज़ूरी मिल चुकी थी और वह फाइनल हो चुका था, जिससे इस स्टेज पर चैलेंज मेंटेन नहीं किया जा सकता।

बेंच ने यह भी कहा कि कोली मछुआरा कम्युनिटी की इस इलाके में लंबे समय से मौजूदगी है, लेकिन धारावी में पिछले कुछ सालों में बड़े पैमाने पर अर्बन डेवलपमेंट हुआ है और रीडेवलपमेंट प्रोसेस पहले से ही चल रहा है।

कोर्ट ने पिटीशनर्स को बाउंड्री डिमार्केशन के मुद्दों के बारे में संबंधित अथॉरिटीज़ से संपर्क करने की इजाज़त दी, लेकिन प्रोजेक्ट को रोकने या बदलने से मना कर दिया।

यह फैसला धारावी रीडेवलपमेंट इनिशिएटिव की तरफ एक अहम कदम है, जिसका मकसद इस इलाके को एक मॉडर्न रेजिडेंशियल और कमर्शियल हब में बदलना है।  रिहैब हाउसिंग के दुरुपयोग को चिह्नित करता है।

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