जो कर्मचारी डिटेंशन की वजह से गैरहाज़िर है, उन्हें बकाया सैलरी नहीं मिलेगी

बॉम्बे हाई कोर्ट ने एक ऐसे कर्मचारी को पूरे 10 साल का बकाया वेतन देने से साफ मना कर दिया है, जो एक गंभीर अपराध में शामिल होने और पुलिस कस्टडी में जाने की वजह से काम से गैरहाजिर था।बॉम्बे हाई कोर्ट ने कहा है कि किसी कंपनी के लिए ऐसे कर्मचारी पर पैसे की सज़ा देना पूरी तरह से गलत होगा, जो अपने ही कामों की वजह से कानूनी मुसीबत में पड़ गया हो।(No salary for the employee absent from work due to being in custody)

यह अहम फैसला जस्टिस संदीप मार्ने की सिंगल बेंच ने दिया है।'नॉर्ड ड्राइव सिस्टम्स' में काम करने वाले विट्ठल म्हास्के ने बकाया वेतन के पेमेंट के बारे में कंपनी को निर्देश देने के लिए कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।

2014 में, विट्ठल म्हास्के को एक संबंधित मामले में सह-आरोपी के तौर पर गिरफ्तार किया गया था और उनकी कार का इस्तेमाल 'POCSO' और दूसरे गंभीर अपराधों में होने के बाद कस्टडी में भेज दिया गया था।

इस बीच, विट्ठल म्हास्के ने गिरफ्तारी से बचने के लिए बीमारी का झूठा बहाना बनाकर छुट्टी मांगी। इसके बाद उन्हें 21 मई से 21 जून 2014 तक कस्टडी में रखा गया। इस दौरान, बिना इजाज़त के गैरहाज़िर रहने पर कंपनी ने उन्हें नौकरी से निकाल दिया।

इसके बाद उन्होंने कंपनी के खिलाफ कोर्ट में पिटीशन फाइल की और अपनी बकाया सैलरी के लिए हर्जाने की मांग की। कोर्ट ने पिटीशन पर फैसला सुनाते हुए उनकी पिटीशन खारिज कर दी।

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