मुंबई हाई कोर्ट ने रेलवे अथॉरिटी को वंदे भारत जैसी सभी लंबी दूरी की ट्रेनों में पब्लिक सेफ्टी अनाउंसमेंट शुरू करने और ट्रेन किन स्टेशनों पर रुकेगी, इसकी साफ जानकारी देने का निर्देश दिया है।जस्टिस जितेंद्र जैन ने मंगलवार को अपने फैसले में यात्रियों को यह भी चेतावनी दी कि वे चलती ट्रेन पकड़ने या उतरने की कोशिश करके अपनी जान जोखिम में न डालें।(Safety Announcements on Long-Distance Trains)
रेलवे ने सुनाया आदेश
कोर्ट ने 10 साल पहले जलगांव रेलवे स्टेशन पर चलती ट्रेन से उतरते समय घायल हुए एक व्यक्ति को 80,000 रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया है।कोर्ट ने कहा कि लोकल ट्रेनों में एक डिस्प्ले बोर्ड या अनाउंसमेंट होता है जो बताता है कि ट्रेन किस स्टेशन पर नहीं रुकेगी। हालांकि, लंबी दूरी की ट्रेनों के मामले में प्लेटफॉर्म पर ऐसा कोई सिस्टम नहीं होता है।कोर्ट ने कहा कि जब इस बारे में कोई अनाउंसमेंट नहीं किया जाता है कि ट्रेन किस स्टेशन पर नहीं रुकेगी। तो ऐसे स्टेशन पर उतरने या उतरने की कोशिश करने वाले यात्री की गलती नहीं मानी जा सकती।
चलती ट्रेन में चढ़ने या उतरने से बचने की भी सलाह
यात्रियों को चलती ट्रेन में चढ़ने या उतरने से बचना चाहिए। इसके बजाय, अगले स्टेशन तक इंतजार करना और जरूरी जुर्माना देना बेहतर है। जस्टिस जैन ने कहा कि कोई भी इंसान ऐसे कदम उठा सकता है जिससे उसकी जान खतरे में पड़ जाए, लेकिन साथ ही, यह उसके दिमागी संतुलन का टेस्ट भी होता है। यात्रियों के परिवारों के बड़े हित में यह ज़रूरी है।
रोहिदास कुमावत ने रेलवे क्लेम ट्रिब्यूनल के जनवरी 2018 के ऑर्डर को चुनौती दी थी। ट्रिब्यूनल ने मुआवज़े के उनके दावे को खारिज कर दिया था और कहा था कि चोट 'खुद से लगी' थी।कुमावत गुवाहाटी एक्सप्रेस में मनमाड से जलगांव जा रहे थे। जब वह जलगांव स्टेशन के पास पहुंचे, तो भीड़ की वजह से उनका हाथ फिसल गया और वह गिर गए, जिससे उनके सिर और पैर में चोटें आईं।
रेलवे ने कहा कि जब उन्हें पता चला कि जलगांव में कोई स्टॉप नहीं है, तो उन्होंने चलती ट्रेन से उतरने की कोशिश की। कोर्ट ने रेलवे अथॉरिटी को 12 हफ़्तों के अंदर कुमावत को 80,000 रुपये का मुआवज़ा देने का आदेश दिया है।
कुमावत एक 'ईमानदार यात्री' थे और यह सोचकर ट्रेन में चढ़े थे कि यह जलगांव में रुकेगी। जब पता चला कि ट्रेन नहीं रुकेगी, तो घबराहट में लिया गया फैसला खुद को नुकसान पहुँचाने के इरादे से नहीं था।
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