बॉम्बे हाई कोर्ट ने शुक्रवार को मुंबई में कई हेरिटेज इलाकों के आसपास जमा कचरे पर चिंता जताई और बृहन्मुंबई म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन (BMC) के "स्वच्छ मुंबई, सुंदर मुंबई" कैंपेन को लागू करने पर सवाल उठाए। कोर्ट ने सिविक बॉडी को सात दिनों के अंदर खास हेरिटेज जगहों के आसपास से कचरा हटाने का निर्देश दिया और कहा कि अगर हालात नहीं सुधरे तो संबंधित वार्ड ऑफिसर जिम्मेदार होंगे।(BMC directed to Clear Garbage Around Heritage Sites Within Seven Days)
जस्टिस गिरीश कुलकर्णी और आरती साठे की डिवीजन बेंच ने कंजुरमार्ग डंपिंग ग्राउंड के पास रहने वाले लोगों को होने वाले प्रदूषण, बदबू, गैस एमिशन और हेल्थ रिस्क से जुड़ी कई पिटीशन पर सुनवाई करते हुए ये बातें कहीं। इनमें से एक पिटीशन कन्नमवार को-ऑपरेटिव हाउसिंग सोसाइटी एसोसिएशन लिमिटेड ने वकील अभिजीत राणे के ज़रिए फाइल की थी। सुनवाई के दौरान, बेंच ने देखा कि यह मामला कंजुरमार्ग लैंडफिल से आगे तक फैला हुआ है और इसमें मुंबई की सड़कों, बीच, नालियों और दूसरी पब्लिक जगहों पर जमा कचरा भी शामिल है। कोर्ट ने कहा कि उसे "गहरा शक" है कि BMC का सफाई कैंपेन असरदार तरीके से लागू हो रहा है या नहीं और वेस्टर्न एक्सप्रेस हाईवे पर दिखने वाले कचरे और प्लास्टिक वेस्ट का ज़िक्र किया।
सिविक बॉडी के नारे, "स्वच्छ मुंबई, सुंदर मुंबई" का ज़िक्र करते हुए, बेंच ने कहा कि कैंपेन का मकसद साफ़ था, लेकिन कहा कि इसे नागरिकों के साथ-साथ म्युनिसिपल मशीनरी की तरफ से कोई एक्शन न लेने की वजह से नाकाम किया जा रहा है। कोर्ट ने आगे कहा कि वार्ड-लेवल के अधिकारियों की ज़िम्मेदारी थी कि वे यह पक्का करें कि पब्लिक सड़कों का इस्तेमाल डंपिंग ग्राउंड के तौर पर न किया जाए और कहा कि अगर असरदार तरीके लागू नहीं किए गए तो कैंपेन का मकसद नाकाम हो जाएगा। कोर्ट ने मानसून के दौरान की हालत का भी ज़िक्र किया और कहा कि खराब हाइजीन से हेल्थ रिस्क हो सकता है। बेंच ने कहा कि खराब हाइजीन की वजह से प्रभावित मरीज़ों की संख्या और कैटेगरी के बारे में हेल्थ डिपार्टमेंट से सलाह लेनी चाहिए।
हेरिटेज लैंडमार्क के पास कचरा हैंडलिंग को लेकर खास चिंता जताई गई। बेंच ने बॉम्बे सिटी सिविल कोर्ट, बॉम्बे हाई कोर्ट, इंस्टिट्यूट ऑफ़ साइंस, राजाबाई टावर और हॉर्निमन सर्कल के बाहर कचरा ट्रांसफर पॉइंट का ज़िक्र किया। कोर्ट ने देखा कि टूरिस्ट के आने-जाने वाली हेरिटेज जगहों के पास कचरा गाड़ी के बूथ और कचरा ट्रकों की लाइनों से परेशानी और बदबू होती है। कोर्ट ने आगे कहा कि अगर ऐसे हालात पब्लिक के लिए ज़रूरी जगहों पर हैं, तो शहर में दूसरी जगहों के हालात की कल्पना की जा सकती है। बेंच ने निर्देश दिया कि पहचानी गई हेरिटेज जगहों के आसपास के हालात सात दिनों के अंदर सुधारे जाएं और कहा कि अगर पालन नहीं किया गया तो संबंधित वार्ड अधिकारियों को ज़िम्मेदार ठहराते हुए आदेश दिए जाएंगे।
BMC की ओर से पेश सीनियर वकील अनिल सखारे ने कोर्ट को बताया कि तुरंत कदम उठाए जाएंगे और कचरा डंपिंग रोकने के लिए सभी वार्डों में उपाय लागू किए जाएंगे। महाराष्ट्र पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड को भी पर्यावरण कानूनों को सख्ती से लागू करने का निर्देश दिया गया। मामले की अगली सुनवाई 12 अगस्त को होगी।
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