शिवसेना के सांसद नरेश म्हस्के ने उबाठा के नेता और राज्यसभा सांसद संजय राऊत पर तीखा हमला बोलते हुए संजय राउत को ‘फेकूचंद’ कहते हुए राउत के आरोपों पर सवाल खड़े किए और उन्हें खुली चुनौती दी है।(Naresh Mhaske challenges Fekuchand Sanjay Raut to first account for his statements and allegations)
शिवसेना सांसद नरेश म्हस्के ने दावा किया कि जिस समय संजय राऊत को राज्यसभा का टिकट मिलने में देरी हो रही थी, उस दौरान उन्होंने उद्धव ठाकरे ही नहीं, बल्कि रश्मी ठाकरे के खिलाफ भी अपशब्दों का इस्तेमाल किया था। उन्होंने कहा कि यह बात पूरी शिवसेना को पता है। म्हस्के ने कहा, राज्यसभा का टिकट और नाम घोषित करने में देरी होने के कारण संजय राऊत ने ठाकरे परिवार के खिलाफ इस तरह की भाषा का इस्तेमाल किया था। यह बात पूरी शिवसेना जानती है।
'उद्धव ठाकरे को मुख्यमंत्री बनाए जाने के बाद भी उनके भाई को मंत्री पद नहीं'
म्हस्के ने आगे दावा किया कि उद्धव ठाकरे को मुख्यमंत्री बनाए जाने के बाद भी उनके भाई को मंत्री पद नहीं दिया गया। उन्होंने कहा कि जब उद्धव ठाकरे मंत्रालय नहीं जाते थे, तब शिवसेना के विधायकों की बैठक पवई के होटल में किसने बुलाई थी, यह भी सभी जानते हैं। उन्होंने यह भी दावा किया कि उस समय विधायकों से उद्धव ठाकरे का विरोध करने और मुख्यमंत्री पद के लिए उनका नाम आगे बढ़ाने की बात कौन कह रहा था, इसकी जानकारी भी पूरी शिवसेना को है। नरेश म्हस्के ने कहा कि संजय राऊत को दूसरों पर आरोप लगाने से पहले अपने पुराने बयानों और उस समय की अपनी भूमिका का जवाब देना चाहिए।
'शिंदे के नेतृत्व पर भरोसा'
म्हस्के ने अपनी राजनीतिक भूमिका स्पष्ट करते हुए कहा कि वह एकनाथ शिंदे के साथ सबसे पहले जुड़ने वाले जिला प्रमुखों में शामिल रहे हैं। उन्होंने कहा कि शिंदे के नेतृत्व पर उनका भरोसा कायम है और वह भविष्य में भी उनके साथ मजबूती से खड़े रहेंगे। म्हस्के ने दावा किया कि जिस दिन एकनाथ शिंदे ने पार्टी से अलग होने का कदम उठाया, उस समय तत्कालीन मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने उन्हें फोन किया था। म्हस्के ने कहा, मैंने उद्धव ठाकरे से साफ कह दिया था कि मैं एकनाथ शिंदे साहेब के साथ हूं और आपसे मिलने नहीं आऊंगा। मुझे वर्षा बंगले पर भी बुलाया गया था। उस समय भी मैंने स्पष्ट कहा था कि एकनाथ शिंदे साहेब को बुलाइए। उनके साथ अन्याय मत कीजिए। जो भी गलतफहमियां हुई हैं, उन्हें दूर कीजिए।
म्हस्के ने संजय राऊत पर भी गंभीर आरोप लगाते हुए कहा की राऊत साहब, अयोध्या दौरे के समय आपने एकनाथ शिंदे साहेब के सामने मुझसे कहा था कि विधान परिषद के लिए मेरा नाम है। लेकिन बाद में आपने अमश्या पडवी को विधान परिषद का टिकट दे दिया। उन्होंने आगे कहा की आप शपथ लेकर बताइए कि क्या आपने ही मुझे यह नहीं बताया था कि उद्धव ठाकरे ने कहा था कि अगर नरेश म्हस्के को विधान परिषद का टिकट दिया गया, तो वह एकनाथ शिंदे के साथ चला जाएगा?
नरेश म्हस्के ने संजय राऊत को खुली चुनौती देते हुए कहा कि अगर उन्होंने एकनाथ शिंदे के खिलाफ कभी कोई शिकायत पत्र लिखा है, तो उसे सार्वजनिक करें। म्हस्के ने कहा कि राऊत ऐसा एक भी पत्र दिखा देते हैं, तो वह राजनीति से इस्तीफा देने के लिए तैयार हैं। साथ ही उन्होंने राऊत से कहा कि अगर वे ऐसा कोई पत्र नहीं दिखा पाते हैं, तो उन्हें खुद राजनीति से इस्तीफा दे देना चाहिए।
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