गाड़ी ट्रांसफर और नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट के लिए आधार ऑथेंटिकेशन

गाड़ी ओनरशिप ट्रांसफर और नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट के लिए पूरे देश में एक जैसा और स्टैंडर्ड ऑनलाइन वर्कफ़्लो लागू किया गया है। इन सर्विसेज़ के लिए संबंधित एप्लीकेंट का आधार ऑथेंटिकेशन ज़रूरी प्रोसेस का हिस्सा बना दिया गया है।(Aadhaar authentication for vehicle transfer and No Objection Certificate)

भारत सरकार के सड़क परिवहन और हाईवे मंत्रालय ने देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में ऑनलाइन ट्रांसपोर्ट सर्विसेज़ को एक जैसे और स्टैंडर्ड तरीके से लागू करने के हिसाब से ओनरशिप ट्रांसफर और नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट सर्विसेज़ के लिए एक बदला हुआ वर्कफ़्लो तय किया है। इस वर्कफ़्लो को संबंधित अथॉरिटी ने मंज़ूरी दे दी है और सर्विसेज़ को उसी हिसाब से प्रोसेस किया जा रहा है।

अगर गाड़ी के रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट (RC) और आधार कार्ड पर नाम में कोई अंतर है, तो गाड़ी के सिस्टम में एक मैसेज आता है, “पिन कोड अपडेट करने के लिए कृपया आधार सेंटर जाएं या RTO जाएं/ कॉन्टैक्टलेस सर्विस का फ़ायदा उठाने के लिए मोबाइल ऑथेंटिकेशन का इस्तेमाल करके अप्लाई करें। नाम गाड़ी और आधार में मैच नहीं कर रहा है।” इसलिए, गाड़ी मालिकों को अपने आधार कार्ड पर नाम को गाड़ी के रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट पर दिए गए नाम के हिसाब से ठीक करवाना होगा। नाम में अंतर दूर होने के बाद, Vahan-4.0 सिस्टम में ज़रूरी सुधार करके आधार ऑथेंटिकेशन प्रोसेस पूरा करना होगा। उसके बाद ही गाड़ी के मालिकाना हक के ट्रांसफर या नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट के लिए अप्लाई करना होगा।

गाड़ी के सिस्टम में ये बदलाव पूरे देश में लागू किए गए हैं। जॉइंट ट्रांसपोर्ट कमिश्नर (IT) शैलेश कामत ने एक प्रेस रिलीज़ में कहा है कि गाड़ी के मालिक अपने आधार कार्ड पर अपना नाम, पता और मोबाइल नंबर अपडेट कर लें ताकि गाड़ी से जुड़ी अलग-अलग ऑनलाइन सर्विस आसानी से और कॉन्टैक्टलेस तरीके से मिल सकें।

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