महाराष्ट्र - हीट वेव से बचने के लिए तीन कॉम्प्रिहेंसिव SOPs जारी

स्टेट गवर्नमेंट ने स्टेट हीट एक्शन प्लान और इंडिया मेटियोरोलॉजिकल डिपार्टमेंट (IMD) के कलर-कोडेड हीट अलर्ट्स के अनुसार, लोगों, खासकर कमज़ोर ग्रुप्स को हीट वेव से बचाने के लिए तीन कॉम्प्रिहेंसिव स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOPs) जारी किए हैं।(Maharashtra Three comprehensive SOPs issued to protect against heat wave)

कई ज़िलों में तापमान बढ़ा 

डिज़ास्टर मैनेजमेंट मिनिस्टर गिरीश महाजन ने भरोसा जताया कि ये उपाय गर्मी से होने वाली बीमारियों और मौतों को कम करने में मददगार होंगे, खासकर इनफॉर्मल वर्कर्स, माइनर्स और कम इनकम वाले ग्रुप्स के लिए। इन SOPs का मेन फोकस 15 ज़्यादा गर्मी वाले जिलों में बाहर काम करने वाले इनफॉर्मल वर्कर्स, चंद्रपुर में कोयला खदानों में काम करने वाले वर्कर्स और गर्मी झेलने वाले घरों और बस्तियों पर है। इसमें लातूर, अमरावती, यवतमाल, वाशिम, अकोला, बुलढाणा, नागपुर, वर्धा, चंद्रपुर, गोंदिया, भंडारा, जलगांव, नंदुरबार, धुले और नांदेड़ जिले शामिल हैं।

सरकारी कर्मचारियों के लिए गाइडेंस 

पहला SOP बाहर काम करने वालों, जैसे स्ट्रीट वेंडर्स, कंस्ट्रक्शन वर्कर्स, ट्रैफिक पुलिस, सैनिटेशन वर्कर्स, डिलीवरी वर्कर्स, रिक्शा चलाने वालों वगैरह के लिए गाइडेंस देता है। काम के शेड्यूल में बदलाव, पानी के ब्रेक, वॉटर बूथ, ORS बांटना, छाया का इंतज़ाम और हेल्थ सुविधाओं को मज़बूत करने जैसे उपाय IMD के येलो, ऑरेंज और रेड अलर्ट के हिसाब से किए जाएंगे।दूसरा SOP चंद्रपुर जिले में कोयला खदानों में काम करने वाले वर्कर्स के लिए है, और यह हीट स्ट्रेस मैनेजमेंट पर फोकस करता है। इनमें कूल रेस्ट सेंटर, पानी की सप्लाई, वेंटिलेशन, वर्क प्लानिंग, जॉब रोटेशन, गर्मी से होने वाली बीमारियों की पहचान की ट्रेनिंग और महिला वर्कर्स के लिए खास सुविधाएं शामिल हैं।

तीसरे SOP में हीट-रेसिस्टेंट हाउसिंग शामिल हैं, जिसमें घरों के थर्मल इम्प्रूवमेंट, कूल रूफ, ग्रीन एरिया और तुरंत, मीडियम और लॉन्ग-टर्म उपायों के ज़रिए क्लाइमेट-सेंसिटिव प्लानिंग पर ज़ोर दिया गया है।ज़्यादा हीट-रिस्क वाले ज़िलों में हीट-रेसिस्टेंट हाउसिंग और बस्तियों को मेनस्ट्रीम करने की सलाह दी जाती है। यह SOP तुरंत, मीडियम-टर्म (1-3 साल) और लॉन्ग-टर्म के लिए तीन-लेवल वाले सॉल्यूशन प्लान पर आधारित है:

तुरंत उपायों में शामिल हैं: हीट रिस्क मैपिंग, कमज़ोर ग्रुप्स को टारगेट करना, पब्लिक अवेयरनेस, कूल सेंटर, घरों का कम लागत वाला थर्मल इम्प्रूवमेंट (रिफ्लेक्टिव रूफ, शेडिंग, वेंटिलेशन)।

मीडियम-टर्म उपाय: PMAY, हाउसिंग स्कीम, बिल्डिंग बाय-लॉज़ और मास्टर प्लान में हीट-रेसिस्टेंट डिज़ाइन (कूल रूफ, ग्रीन स्पेस) को शामिल करना।

लॉन्ग-टर्म उपाय: स्टेट बिल्डिंग कोड, क्लाइमेट-सेंसिटिव ज़ोनिंग और सभी के लिए समान तापमान वाली सुविधाएं।

ये तीनों SOPs डिपार्टमेंट के बीच तालमेल, हेल्थ सेंटर और वर्कर के फीडबैक के आधार पर रेगुलर रिव्यू, और इनफॉर्मल वर्कर के रिप्रेजेंटेशन पर ज़ोर देते हैं। डिस्ट्रिक्ट कंट्रोल रूम (1077), एम्बुलेंस (108), पुलिस हेल्पलाइन (112/100) और दूसरे ज़रूरी कॉन्टैक्ट नंबर भी सर्कुलेट किए गए हैं।

ये SOPs डिस्ट्रिक्ट डिज़ास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी, म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन, पब्लिक वर्क्स डिपार्टमेंट, अर्बन प्लानिंग डिपार्टमेंट, MHADA, CIDCO, लोकल गवर्नमेंट बॉडीज़ वगैरह जैसे खास डिपार्टमेंट के ज़रिए लागू किए जाएंगे।

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