उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने शनिवार को मुंबई स्थित नंदनवन बंगले पर स्कूली शिक्षा मंत्री दादा भुसे जी तथा शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ चार घंटे तक बैठक कर राज्य की शिक्षा व्यवस्था की विस्तृत समीक्षा की।इस दौरान शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने विभाग द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं, पहलों और अब तक हुई प्रगति की जानकारी शिंदे को दी।(Work on mission mode to transform Maharashtra's education system - Deputy Chief Minister Eknath Shinde directs the Education Department)
शिक्षा विभाग मिशन मोड में
शिक्षा मंत्रालय द्वारा किए जा रहे अच्छे कार्यों की सराहना करते हुए शिंदे ने निर्देश दिया कि अब शिक्षा विभाग मिशन मोड में काम करे और इन पहलों का लाभ महाराष्ट्र के प्रत्येक स्कूल और प्रत्येक विद्यार्थी तक पहुंचाना सुनिश्चित करे।उन्होंने राज्य के स्कूलों के आधुनिकीकरण तथा शिक्षा व्यवस्था में वास्तविक, दृश्यमान और गुणवत्तापूर्ण बदलाव लाने के लिए स्पष्ट, व्यापक और समयबद्ध कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश शिक्षा विभाग को दिए।
“हमारे बच्चों की आकांक्षाएं बदल रही हैं, उनके सपने बदल रहे हैं। उसी के अनुरूप हमारे स्कूल भी बदलने चाहिए। महाराष्ट्र के हर बच्चे को भविष्य के अवसरों और चुनौतियों के लिए तैयार करने वाली आधुनिक, गुणवत्तापूर्ण और भविष्य के लिए तैयार शिक्षा व्यवस्था हमें बनानी है,” एकनाथ शिंदे ने कहा।
इस कार्ययोजना में शिक्षा क्षेत्र के विशेषज्ञों और अनुभवी शिक्षकों को साथ जोड़ना, शिक्षकों के प्रशिक्षण, प्रोत्साहन और क्षमता-विकास कार्यक्रमों को मजबूत करना तथा उत्कृष्ट और नवोन्मेषी कार्य करने वाले शिक्षकों को प्रोत्साहित एवं सम्मानित करना शामिल होगा।
शिक्षा योजनाओं के प्रभावी और समयबद्ध क्रियान्वयन पर भी विशेष ध्यान देने के निर्देश
एकनाथन शिंदे वे महाराष्ट्र में केंद्र सरकार की विभिन्न शिक्षा योजनाओं के प्रभावी और समयबद्ध क्रियान्वयन पर भी विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए, ताकि इन योजनाओं का लाभ राज्य के स्कूलों और विद्यार्थियों तक प्रभावी रूप से पहुंचे।
हर विद्यार्थी का सर्वांगीण विकास प्राथमिकता
एकनाथ शिंदे ने कहा कि शिक्षा केवल पाठ्यक्रम और परीक्षाओं तक सीमित नहीं होनी चाहिए। विद्यार्थियों का शारीरिक, मानसिक, बौद्धिक और भावनात्मक विकास शिक्षा व्यवस्था के केंद्र में होना चाहिए।उन्होंने विद्यार्थियों की नियमित स्वास्थ्य जांच, पोषण, मध्यान्ह भोजन योजना की समीक्षा तथा विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य और भावनात्मक कल्याण से जुड़े कार्यक्रमों पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए।
माता-पिता और समाज शिक्षा के भागीदार बनें
एकनाथ शिंदे ने स्कूलों और शिक्षा व्यवस्था में माता-पिता, पूर्व विद्यार्थियों और स्थानीय समुदाय की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने पर जोर दिया।उन्होंने कहा कि शिक्षा विभाग द्वारा किए जा रहे अच्छे कार्य और सफल पहलों की जानकारी जनता तक प्रभावी ढंग से पहुंचनी चाहिए, ताकि महाराष्ट्र के स्कूलों में हो रहे सकारात्मक बदलावों की जानकारी विद्यार्थियों, अभिभावकों और समाज को मिल सके।
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