एकता की मिसाल: गणपति और मोहर्रम साथ-साथ, बच्चों की अनोखी पहल

इन बच्चों में किरण ,सुजल,बाबू ,ज़ैद अल्तमश जैसे नाम शामिल हैं। यह लाइन इसीलिए लिखी गयी क्योंकि नाम में धर्म ढूंढने वाले लोग आँख फाड़ कर पढ़ लें।

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हिंदू और मुस्लिम की राजनीति करने वाले लोग भले ही अपने सियासी फायदे के लिए दोनों धर्मों के बीच नफरत का बीज बोते हो लेकिन इन्हे कुछ छोटे बच्चो से सीख लेनी चाहिए, जो इस नफरत की राजनीति के बीच गंगा-जमूनी तहजीब पेश कर एक नयी मिसाल पेश कर रहे हैं।


उतारें धर्म का चश्मा 

मुंबई के करीब पालघर के नालासोपारा में रहने वाले ये बच्चे शिवशक्ति दर्शन नामकी सोसायटी में रहते हैं। ऐसा भी नहीं है कि ये लोग अमीर घरों के हैं।इन बच्चों के संस्कार कहें या अच्छी शिक्षा, इन्होने कुछ ऐसा किया कि लोग वाह-वाह कर रहे हैं। इन बच्चों में किरण ,सुजल,बाबू ,ज़ैद अल्तमश जैसे नाम शामिल हैं। नाम का जिक्र इसीलिए है क्योंकि नाम में धर्म ढूंढने वाले लोग आँख फाड़ कर पढ़ लें।


हिन्दू-मुस्लिम एकता की मिसाल 

इस बार गणेश चतुर्थी और मुहर्रम दोनों त्योंहार साथ-साथ पड़े हैं। लिहाजा इन बच्चों ने दोनों त्यौहार साथ-साथ मनाने की सोची। इसके लिए इन्होने अपना जेब खर्च तो बचाया ही साथ ही लोगों से चंदा भी इकट्ठा किया। और एक छोटा सा पंडाल बना कर उसी में विधिवत पूजा अर्चना के साथ डेढ़ दिन के गणपति को स्थापित भी किया तो एक बगल मोहर्रम के छबील को बनाकर उसे सजाया और पानी का मटका रखा। हालांकि खबर लिखने तक बच्चों ने गणपति विसर्जन कर दिया होगा।


सामाजिक सन्देश 

यही नहीं इन बच्चों ने पंडाल में नालासोपारा में 11 जुलाई को आई भारी बरसात के बाद हुए जलभराव के हालात को दर्शाते हुए प्रोजेक्ट बनाया और लोगों को सामाजिक संदेश देते हुए कचरे और प्लास्टिक को गटर नाले में न फेंकने का पोस्टर के ज़रिए आव्हान भी किया था। खैर लोग इन बच्चों से थोड़ा भी सीख लें तो डर और भय के साये में जीने से बड़ी राहत मिल सकती है।

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