सार्वजनिक परीक्षाओं में गड़बड़ियों की रोकथाम से जुड़े संशोधन विधेयक पर लोकसभा में चर्चा के दौरान शिवसेना सांसद डॉ. श्रीकांत शिंदे ने विपक्ष पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि मोदी सरकार युवाओं के भविष्य की रक्षा के लिए निर्णायक कदम उठा रही है, जबकि विपक्ष छात्रों के दर्द पर केवल राजनीति करने में लगा है।(The youth is not with you, only politics is with you Shrikant Shinde's scathing attack on the opposition)
युवाओं के आक्रोश को आंदोलन नहीं, बल्कि व्यवस्था परिवर्तन की शुरुआत
डॉ. शिंदे ने कहा कि हम युवाओं के आक्रोश को आंदोलन नहीं, बल्कि व्यवस्था परिवर्तन की शुरुआत मानते हैं। कोई भी परीक्षा किसी छात्र की पूरी जिंदगी तय नहीं करती। यदि किसी परीक्षा में सफलता नहीं मिलती, तो युवाओं को निराश होने के बजाय अपने जीवन, अपने परिवार और अपने देश के भविष्य के बारे में सोचना चाहिए।
उन्होंने युवाओं से छत्रपति शिवाजी महाराज के जीवन से प्रेरणा लेने का आह्वान करते हुए कहा कि मात्र १६ वर्ष की आयु में शिवाजी महाराज ने पहला किला जीतकर हिंदवी स्वराज्य की नींव रखी थी। आज का युवा भी देश बदलने की ताकत रखता है, जरूरत केवल सही दिशा और मजबूत व्यवस्था की है।
पूरे सिस्टम को साफ करने का काम
डॉ. शिंदे ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार ने केवल पेपर लीक की घटनाओं की निंदा नहीं की, बल्कि पूरे सिस्टम को साफ करने का काम किया है। सरकार की नैतिक जवाबदेही का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दिया और अब पेपर लीक के आरोपियों को जल्द से जल्द सजा दिलाने के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट की व्यवस्था इस संशोधन विधेयक के माध्यम से की जा रही है। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल अपराधियों को जेल भेजना नहीं, बल्कि लाखों छात्रों का एक-एक साल बचाना है।
विद्यार्थियों को वर्ष में कई बार परीक्षा देने का अवसर मिलना चाहिए
शिक्षा व्यवस्था में सुधार की आवश्यकता पर जोर देते हुए डॉ. शिंदे ने कहा कि वर्षों की मेहनत और परिवारों के सपनों का फैसला केवल तीन घंटे की परीक्षा से नहीं होना चाहिए। विद्यार्थियों को वर्ष में कई बार परीक्षा देने का अवसर मिलना चाहिए। प्रश्न बैंक प्रणाली विकसित करने, छात्रों पर बढ़ते मानसिक दबाव को कम करने और कोचिंग उद्योग पर प्रभावी नियमन लागू करने की दिशा में भी सरकार को आगे बढ़ना चाहिए।
उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र में महायुति सरकार ने आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग तथा ईसी-बीसी वर्ग की बेटियों के लिए मुफ्त शिक्षा की ऐतिहासिक पहल की है। यह सरकार केवल कानून नहीं बना रही, बल्कि शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार लाने का संकल्प लेकर आगे बढ़ रही है।
विपक्ष पर तीखा हमला बोलते हुए डॉ. श्रीकांत शिंदे ने कहा कि आज जो लोग युवाओं के हितैषी बनने का दावा कर रहे हैं, वे छात्र आंदोलन के दौरान ३७ दिनों तक जंतर-मंतर तक नहीं पहुंचे। उन्हें डर था कि कहीं कोई नया राजनीतिक विकल्प खड़ा न हो जाए। अब जब राजनीतिक जमीन खिसकती दिखाई दी, तो युवाओं के नाम पर राजनीति शुरू कर दी।
उन्होंने कहा कि पहले विपक्ष यह बताए कि युवा वास्तव में उनके साथ हैं भी या नहीं। छात्रों की भावनाओं को भड़काना, सरकार को गालियां देना और भ्रम फैलाना किसी समस्या का समाधान नहीं है। लोकतंत्र में सरकार ने छात्रों से संवाद किया, उनकी बात सुनी और कई मामलों में उनके खिलाफ दर्ज मुकदमे भी वापस लिए। यही लोकतंत्र की ताकत और मोदी सरकार की संवेदनशीलता है।
डॉ. शिंदे ने कहा कि यह संशोधन विधेयक केवल पेपर लीक रोकने का कानून नहीं, बल्कि करोड़ों युवाओं के भविष्य को सुरक्षित करने, परीक्षा प्रणाली को पारदर्शी बनाने और शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार लाने का मजबूत संकल्प है। विपक्ष को राजनीति छोड़कर देश के युवाओं के भविष्य के साथ खड़ा होना चाहिए।
संसद में परीक्षा सुधार विधेयक पर चर्चा के दौरान शिवसेना सांसद डॉ. श्रीकांत शिंदे ने कहा कि देश की परीक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि नीट जैसी महत्वपूर्ण परीक्षा साल में केवल एक बार होने से लाखों छात्रों पर अनावश्यक दबाव पड़ता है।
डॉ. शिंदे ने कहा कि बीमारी, पारिवारिक कारणों या अन्य परिस्थितियों के चलते कई छात्र परीक्षा नहीं दे पाते, विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यार्थियों को अधिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में उनका पूरा एक साल बर्बाद हो जाता है।
उन्होंने सुझाव दिया कि नीट परीक्षा साल में एक से अधिक बार आयोजित करने पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए। कई देशों में ऐसी परीक्षाएं वर्ष में दो बार होती हैं। भारत में भी यह व्यवस्था लागू होने से छात्रों को दूसरा अवसर मिलेगा और मानसिक दबाव भी कम होगा।
डॉ. शिंदे ने कहा कि केवल नीट ही नहीं, बल्कि अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की व्यवस्था में भी समय के अनुसार सुधार किए जाने चाहिए, ताकि छात्रों को निष्पक्ष और बेहतर अवसर मिल सकें।
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