मुंबई के शिवाजी पार्क में महायुति की एक भव्य जनसभा का आयोजन किया गया। इस सभा में महायुति के सभी प्रमुख नेता मंच पर मौजूद रहे और बड़ी संख्या में कार्यकर्ता तथा नागरिक उपस्थित थे। सभा को संबोधित करते हुए शिवसेना के मुख्य नेता और महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने कहा कि शिवतीर्थ और शिवसेना का अटूट नाता है और अब उसी तरह महायुति का भी शिवतीर्थ से अटूट रिश्ता बन गया है। उन्होंने कहा कि यह सभा केवल प्रचार नहीं, बल्कि बदलाव की लहर है। (When they need money, they remember the industrialists says Eknath Shinde's attack on Raj Thackeray and the Uddhav Thackeray faction)
उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे पर साधा निशाना
एकनाथ शिंदे ने कहा, “विरोधी आते हैं, आरोप लगाते हैं और चले जाते हैं। अब हमें इसकी आदत हो गई है। मैं अब आरोपों का जवाब शब्दों से नहीं, हमारे काम से देता हूं।”उन्होंने कहा कि मुंबई देश की आर्थिक राजधानी है और उसे उसी स्तर पर दिखना चाहिए, यही महायुति का संकल्प है। उन्होंने विरोधियों पर निशाना साधते हुए कहा कि कुछ लोगों को चुनाव आते ही मराठी आदमी याद आता है। पांच साल तक घर में बैठने वाले लोग चुनाव आते ही कहते हैं कि मुंबई खतरे में है। उन्होंने स्पष्ट किया कि मुंबई खतरे में नहीं है और महायुति के रहते कभी नहीं होगी।
"मुंबई की जनता ऐसे बयानों को नजरअंदाज कर रही "
उबाठा से सवाल करते हुए शिंदे ने कहा कि सत्ता में रहते हुए उन्होंने मराठी आदमी के लिए क्या किया, यह जनता को बताना चाहिए। उन्होंने कहा कि हर चुनाव को मराठी आदमी की आखिरी लड़ाई बताकर भावनात्मक मुद्दे खड़े किए जाते हैं, लेकिन अब मुंबई की जनता ऐसे बयानों को नजरअंदाज कर रही है।एकनाथ शिंदे ने साफ शब्दों में कहा कि मुंबई का महापौर महायुति का होगा और वह मराठी होगा। उन्होंने कहा कि मराठी आदमी मुंबई से बाहर क्यों गया, इस पर भी उबाठा को जवाब देना चाहिए। आज महायुति उसी मराठी आदमी को वापस मुंबई लाने का संकल्प ले रही है। हम केवल बोलते नहीं, करके दिखाते हैं। हमारे लिए मुंबई सबसे पहले है।
20 हजार इमारतों को OC
उन्होंने कहा कि उनकी सरकार ने २० हजार इमारतों को ओसी दिया, पगड़ी प्रथा खत्म की, गड्ढा मुक्त और झोपड़ी मुक्त मुंबई का संकल्प लिया, क्लस्टर योजना लागू की, गृहिणी कामगारों को घर दिए और आगे एक लाख गृहिणी कामगारों को घर देने का लक्ष्य रखा है।उबाठा से सवाल करते हुए उन्होंने कहा कि वे अपने कार्यकाल का एक भी बड़ा काम बताएं। उल्टे उन्होंने देवेंद्र फडणवीस के कामों को रोकने का काम किया। उन्हीं कामों को हमारी सरकार ने दोबारा शुरू किया। शिंदे ने दावा किया कि उबाठा के कारण महाराष्ट्र को करीब १० हजार करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। उन्होंने आरोप लगाया कि उबाठा बंगले पर बंगले बनाते रहे और गरीब नाले के किनारे रहने को मजबूर रहा। उन्होंने कहा, हम जमीन से जुड़े कार्यकर्ता हैं और आप घर में बैठने वाले नेता हैं।
"दोनों स्वार्थ के लिए साथ आए"
पहलगाम हमले का जिक्र करते हुए शिंदे ने कहा कि इस हमले में हमारे हिंदू भाई-बहन मारे गए। प्रधानमंत्री ने अपना विदेश दौरा छोड़कर देश वापसी की, लेकिन कुछ नेता लंदन से लौटकर नहीं आए। उन्होंने सवाल किया कि क्या उनका लगाव लंदन से इतना ज्यादा है।राज ठाकरे और उद्धव ठाकरे पर निशाना साधते हुए शिंदे ने कहा कि दोनों एक-दूसरे के खिलाफ क्या-क्या बोलते थे, यह महाराष्ट्र की जनता जानती है। आज दोनों स्वार्थ के लिए साथ आए हैं। उन्होंने कहा कि हम बालासाहेब ठाकरे के विचारों पर चलते हैं, लेकिन जब आपने अपने ही भाई के नगरसेवकों को तोड़ा था, वह क्या था, यह भी जनता को बताना चाहिए।
"उबाठा ने मराठी आदमी और महाराष्ट्र की पीठ में छुरा घोंपने का काम किया"
शिंदे ने कहा कि उबाठा ने मराठी आदमी और महाराष्ट्र की पीठ में छुरा घोंपने का काम किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि उबाठा के लोगों ने केवल पैसे खाने का काम किया , खिचड़ी में, कोविड में और उन्होंने मराठी ठेकेदारों को ब्लैकलिस्ट करने का काम किया है। पोस्टरों पर तंज कसते हुए शिंदे ने कहा, “करून दाखवले” की जगह “खाऊन टाकले” लिखना चाहिए। उन्होंने कहा कि महायुति सरकार ने मुंबई के विकास के लिए केंद्र सरकार से मंजूरी भी ली और धन भी लाया, जबकि विरोधियों ने कुछ नहीं किया। हमने मुंबई के कई प्रोजेक्ट्स को गति दी है। हम जोड़ने वाले लोग हैं, तोड़ने वाले नहीं।
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