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आग हादसा: ऊंची ऊंची इमारत में लगने वाले कांच बन रहे हैं मौत की वजह

यही नहीं इन इमारतों में जो कांच लगाए जाते हैं उन कांच से भी आग को फैलने में मदद मिलती है। इस इमारत में जब आग लगी तब धुएं को बाहर निकलने के लिए रास्ता ही नहीं मिला जिससे धुआं अंदर ही फ़ैलने लगा।

आग हादसा: ऊंची ऊंची इमारत में लगने वाले कांच बन रहे हैं मौत की वजह
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गोरेगांव के 'टेक्निक प्लस वन' बिल्डिंग में लगी आग में 4 मौत हो गई। बताया जाता है कि जिन चार लोगों की मौत हुई उनका बिल्डिंग के अंदर ही दम घुट गया था और इसकी वजह बतायी जा रही है बिल्डिंग में लगने वाले कांच को। कॉमर्शियल बिल्डिंग में बड़े बड़े कांच लगते हैं और जब आग लगती है तो इन्ही कांच के कारण धुआं बाहर नहीं जा पाता जिससे लोग आगे की चपेट में आने से कम बल्कि दम घुटने से अधिक मरते हैं।  
यही नहीं इस आग को बुझाने के लिए जो दमकल कर्मी भी बिल्डिंग के अंदर घुसे थे वो भी धुएं की चपेट में आकर बीमार हो गए। इस बिल्डिंग में काम करने वाले एक कर्मचारी ने बताया कि इस बिल्डिंग में एसी की हवा बाहर है निकले इसीलिए बिल्डिंग को कांच से पैक किया गया था।

दमकल विभाग ने बनाया है नियम 

 मुंबई में जितने भी कॉमर्शियल इमारतें बन रहीं हैं सभी में बड़े बड़े ग्लास लागए जा रहे हैं। आपको बता दें कि कमर्शियल इमारतों में लगने वाले कांच को लेकर दमकल विभाग ने 21 सितंबर 2016 में एक जीआर जारी किया था। इस जीआर के मुताबिक जिन इमारतों में कांच लगाए जाते हैं उन इमारतों की सीढ़ियां, लिफ्ट और कॉरीडोर की जगह पर्याप्त होने चाहिए। इसके अलावा ये कांच ऐसे लगने चाहिए कि आपातकाल में इन्हे आसानी से खोला जा सकें। नियमानुसार ऐसे इमारतों की हर मंजिलों पर कम से कम ढाई फीसदी भाग खुले होने चाहिए। लेकिन इन सारे नियमों की अनदेखी 'टेक्निक प्लस वन' में की गयी थी।

कांच से भी फैलती है आग 
यही नहीं इन इमारतों में जो कांच लगाए जाते हैं उन कांच से भी आग को फैलने में मदद मिलती है। इस इमारत में जब आग लगी तब धुएं को बाहर निकलने के लिए रास्ता ही नहीं मिला जिससे धुआं अंदर ही फ़ैलने लगा।जिससे दम घुटने से चार लोगों की मौत हो गयी और धुएं की ही चपेट में दमकल कर्मी भी आकर बीमार हो गए।

नियमों की होती है अनदेखी 
गौरतलब है कि इसी तरह की आग 4 साल पहले अंधेरी के लॉट्स बिल्डिंग सेंटर में भी लगी थी जिसमें दमकल के एक जवान नितिन इवलेकर की दम घुटने से मौत हो गयी थी। इस आग ने भी चार लोगों की बली ली थी। इसी तरह से नियम तो बन जाते हैं लेकिन जमीनी स्तर पर उनका पालन नहीं किया जाता है। जिसका परिणाम लोगों की मौत के रूप में सामने आता है।

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