बीएमसी के लिए ‘शिल्ट’ बना सिरदर्द

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बीएमसी के लिए ‘शिल्ट’ बना सिरदर्द

नालों सफाई के दौरान निकले शिल्ट (गंदी मिट्टी) के फैलाव से पर्यावरण के ख़राब होने के मुद्दे को लेकर बुधवार को बीजेपी नेता स्थायी समिति में चुप ही रहे। एफ/उत्तर इलाके में बड़े नालों को साफ़ करने का प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गयी है, लेकिन इस प्रस्ताव को लेकर बीजेपी नेताओं ने मुंह नहीं खोला। पारदर्शिकता के मुद्दे पर बीजेपी ने अपना एजेंडा तय किया हुआ है लेकिन नाले सफाई में हो रही खामियां को लेकर जिस तरह बीजेपी चुप है उससे कई सवाल उठ रहे हैं।

बीएमसी के विरोधी पक्ष नेता रवि राजा ने कचरे को ढोने वाले वाहनों पर लगे व्हीकल ट्रैकिंग सिस्टम (वीटीएस) पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि नालासफाई प्रस्ताव में वीटीएस से बीएमसी को (तकनीकी विभाग) जोड़ने के लिए कह जा रहा था लेकिन आईटी विभाग इसके लिए तैयार नहीं था। 2014 में बीएमसी के सभी विभागों की गाड़ियों पर वीटीएस लगाये जाने का प्रस्ताव पेश हुआ था लेकिन वह लागू नहीं की गयी। साथ ही छोटे नालों में से सिल्ट निकालने के लिए कम से कम साढ़े 5 लाख एनजीओ को कार्य सौंपा गया था। रविराजा ने सवाल किया कि क्या वास्तव में उतने कर्मचारी थे। इस पर अतिरिक्त आयुक्त पल्लवी दराडे और संचालक लक्ष्मण वटकर ने कोई संतोष जनक उत्तर नही दिया। इस मुद्दे पर किसी को आपत्ति नही होने से स्थायी समिति अध्यक्ष ने इस प्रस्ताव को मंजूर कर दिया।

एफ/उत्तर विभाग के नाला सफाई प्रस्ताव को मंजूरी मिलने से शिवसेना नगरसेवक मंगेश सातमकर ने प्रस्ताव को स्वीकार करने में आशंका व्यक्त की। सपा के राईस शेख ने कचरे से पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने के लिए मनपा और समिति को जिम्मेदार बताया। विरोध पक्षनेता रविराजा ने कहा कि एक अप्रैल से कम शुरू होगा तो अनेक प्रस्ताव जो विलंब होंगे उसका जिम्मेदार कौन होगा, इसकी जाँच करने की मांग की.

एल विभाग के मीठी नदी को साफ करने और उसमें से निकलने वाले शिल्ट से पर्यावरण को खतरा पहुंचने की चिंता जताई। इस पर सभागृह नेता यशवंत जाधव ने मीठी नदी का निरिक्षण किये बिना प्रस्ताव को मंजूरी नहीं दिए जाने की बात कही। स्थायी समिति ने छोटे नाले और सड़कों के किनारे बने नालों की सफाई और उनके शिल्ट के कार्य को ठेकेदारों से कराने की मंजूरी दे दी।

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