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पिछलें 38 सालों में पूर्व राष्ट्रपति प्रतिभा पाटील के कार्यकाल के दौरान सबसे ज्यादा फांसी की सजा माफ

पूर्व राष्ट्रपति प्रतिभा पाटील के कार्यकाल के दौरान 19 फांसी की सजाओं को उम्रकैद में बदला गया

पिछलें 38 सालों में पूर्व राष्ट्रपति प्रतिभा पाटील के कार्यकाल के दौरान सबसे ज्यादा फांसी की सजा माफ
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सुप्रीम कोर्ट द्वारा फांसी की सजा सुनाए जाने के बाद राष्ट्रपति के पास दायर की गई दया माफी याचिका यानी की मर्सी पेटिसन में से सबसे ज्यादा मर्सी पेटिसन को  पूर्व राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल के कार्यकाल के दौरान उम्र कैद में बदला गया है। पिछलें 38 सालों में  पूर्व राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल के कार्यकाल के दौरान सबसे ज्यादा फांसी की सजा माफ की गई है और इन सजाओं को उम्र कैद में बदल दिया गया। 

एक आरटीआई के जरिये ये बात सामने आई है। आरटीआई कार्यकर्ता शकील अहमद शेख ने गृहमंत्रालय में एक आरटीआई दायर कर इस बात की जानकारी मांगी थी की साल 1981से लेकर अभी तक राष्ट्रपति द्वारा प्राप्त कितनी दया याचिकों को रद्द किया गया और कितनों को मांफ किया गया।  ज्युडिसियल विभाग के  ज्वाइंट सेक्रेट्री डैनियल रिचर्ड की ओर से इस आरटीआई का जवाब दिया गया जिसमें इस बात की जानकारी मिली की साल 1981 से लेकर अभी तक सबसे ज्यादा दया याचिकाओं को  पूर्व राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल के कार्यकाल यानी की साल 2007 से लेकर साल 2012 तक के बीच में उम्रकैद में बदल दिया गया। 


22 दया याचिकाओं पर फैसला

पूर्व राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल ने अपने कार्यकाल के दौरान कुल 22 दया याचिकाओं पर फैसला लिया।  22 दया याचिकाओं में से उन्होने 19 दया याचिकाओं को उम्र कैद के रुप में परिवर्तीत कर दिया तो वही 3 दया याचिकाओं को रिजेक्ट कर दिया।  



मौजूदा राष्ट्रपित रामनाथ कोविंद ने भी खारिज की याचिका

मौजूदा राष्ट्र्पति  रामनाथ कोविंद ने अपने अभी तक के कार्यकाल के दौरान एक ही दया याचिका पर फैसला लिया है और उन्होने उस याचिका को खारीज कर दिया है। 


प्रणव मुखर्जी ने लिए 35 दया याचिकाओं पर फैसला

पूर्व राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी ने अपने कार्यकाल के दौरान यानी की साल 2012 से साल 2017 तक 35 दया याचिकाओं पर फैसला लिया।  35 दया याचिकाओं में से उन्होने 31 दया याचिकाओं को खारीज कर दिया और 4 दया याचिका को उन्होने उम्र कैद में बदल दिया।  

एपीजे अब्दूल कलाम

पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दूल कलाम ने भी अपने कार्यकाल के दौरान यानी की साल 2002 से साल 2007 के बीट सिर्फ दो दया याचिकाओं पर फैसला लिया जिनमें से उन्होने एक को रिजेक्ट कर दिया तो वही एक की फांसी की सजा को उम्रकैद में बदल दिया। 


पूर्व राष्ट्रपति जैल सिंह 

पूर्व राष्ट्रपति जैल सिंह ने अपने कार्यकाल के दौरान यानी की साल 1982 से लेकर साल 1987 तक 22 दया याचिकाओं पर फैसला लिया , जिनमे से उन्होने 19 दया याचिकाओं को रिजेक्ट कर दिया और 3 की फांसी को उम्र कैद में बदल दिया। 


पूर्व राष्ट्रपति रामास्वामी वेंकेटरमन

पूर्व राष्ट्रपति रामास्वामी वेंकेटरमन ने अपने कार्यकाल के दौरान यानी साल 1987 से लेकर 1992 तक कुल 39 याचिकाओं पर फैसला लिया । जिनमे से उन्होने 6 याचिकाओं को उम्रकैंद में बदल दिया तो वही 33 याचिकाओं को रिजेक्ट कर दिया। 

पूर्व राष्ट्रपति श्याम दयाल शर्मा

पूर्व राष्ट्रपति श्याम दयाल शर्मा ने अपने कार्यकाल के दौरान यानी साल 1992  से लेकर 1997 तक कुल 12 याचिकाओं पर फैसला लिया और सभी को उन्होने रिजेक्ट कर दिया। 

के आर नारायण 

पूर्व राष्ट्रपति के आर नारायण ने अपने कार्यकाल के दौरान यानी की साल 1997 से लेकर साल 2002 तक सिर्फ एक दया याचिका पर फैसला लिया जिसे उन्होने रिजेक्ट कर दिया था। 


1993 में मुंबई में हुए सिलसिलेवार बम धमाको के आरोपी याकूब मेनन ने दो बार दया याचिका दायर की थी। 2 जनवरी 2014 और 26 जुलाई 2015 को याकूब मेनन ने राष्ट्रपति के सामने दया याचिका दी थी हालांकी दोनों ही बार राष्ट्रपति ने उसकी याचिका को खारीज कर दिया था। याकूब मेनन की दूसरी दया याचिका पर सबसे जल्दी यानी की सिर्फ 3 दिन में ही फैसला लिया गया, 26 जुलाई 2015 को उसे अपनी दूसरी दया याचिका राष्ट्रपति के सामने दी और 29 जुलाई को राष्ट्रपति ने उसे रिजेक्ट कर दिया।   तो वही संसद पर हमले के आरोपी  अफजल गुरु ने 3 अक्टूबर 2006 के दिन राष्ट्रपति के सामने दया याचिका दायर की थी जिसका फैसला फरवरी 2013 को लिया गया और उसकी फांसी की सजा को जारी रखा गया।

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