फिर कब बनेगा हैंकॉक ब्रिज ?

मुंबई- हैंकॉक ब्रिज को रेलवे प्रशासन ने 15 महीनें पहले ही तोड़ा था। लेकिन अभी तक इस ब्रिज का पुन:निर्माण कार्य अभी तक शुरु नहीं हुआ है। जिससे लोगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
हैंकॉक ब्रिज को 1897 में ब्रिटिश सरकार ने बांधा था। इस ब्रिज की कुल लंबाई 45 मीटर है। 1932 में इस ब्रिज की मरम्मत की गई। सैंडहस्ट रोड और भायखला को जोड़नेवाला ये इकलौता ब्रिज है। एक समय बॉम्बे म्युसिपल कॉर्पोरेशन के अध्यक्ष रह चुके कर्नल एच.एफ. हैंकॉक के नाम पर इस ब्रिज का नाम हैंकॉक ब्रिज रखा गया।रेलवे को एसी डीसी करने के लिए 2009 में रेवले ने बीएमसी से इस तोड़ने की इजाजत मांगी। साथ ही हैंकॉक ब्रिज को तोड़ने के बाद रेलवे ने नया ब्रिज बनाने की भी बात कही थी। 2012 तक बीएमसी ने इस ब्रिज को तोड़ने की इजाजत नहीं दी। 2012 के बाद रेलवे ने इस पूल को धोकादायक पूल बता दिया। धोकादायक पूल की लिस्ट में नाम डालने के बाद नया पूल बनाने की जवाबदारी रेलवे की नहीं रहती। इसी के कारण अब बीएमसी और रेलवे एक दूसरे पर जिम्मेदारी ढकेलती दिख रही है।

नवंबर 2015 में ब्रिज को यातायात के लिए बंद कर दिया गया था। साथ ही जनवरी 2016 में इसे तोड़ने का कार्य शुरु किया गया। ब्रिज को तोड़ने के लिए मध्य रेलवे की ओर से 18 घंटे का जम्बोब्लॉक रखा गया था। ब्रिज को 19 घंटो में तोड़ा गया। जिसके चलते 42 मेल और 100 लोकल गाड़ियों को रद्द करना पड़ा। 699 लोकल के मार्ग बदले गए।


जहां पहले इस ब्रिज का इस्तेमाल कर डोंगरी से मजगांव सिर्फ 5 मिनट में ही पहुंचा जा सकता था तो वही इब इसी दूरी के लिए 45 मिनट लगते है। अब एक आरटीआई कार्यकर्ता का कहना की आरटीआई से मिली जानकारी के मुताबिक ये ब्रिज धोकादायक नहीं था। साथ ही ब्रिज को बांधने का ठेका भी बीएमसी ने ब्लैकलिस्टेड ठेकेदार को दिया है।


पिछलें 15 महीनों में इस रुट से 35 से भी अधिक लोगों ने अपनी जान गांवाई है। इसमें कई स्कूली बच्चे भी शामिल थे। बॉम्बे हाईकोर्ट ने 17 मार्च को प्रशासन से 15 दिन के अदंर इस ब्रिज को लेकर कोई ठोस रास्ता निकालने की बात कही है। अब देखना ये की क्या इस ब्रिज के ना होने के कारण जनता को होनेवाली तकलीफें आखिर कब कम होंगी।

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