विश्वडाक दिवस विशेष - जमाने के साथ बदल रही है डाक सेवा की तस्वीर


SHARE

पोस्ट मैन शब्द का नाम शायद ही किसी ने नहीं सूना होगा, हालांकी आज तकनीक से भरी दुनियां में पोस्ट की जगह हाई स्पीड कूरियर कंपनियों और मोबाईल के एसएमएस और वाट्सएप ने ले ली है। हालांकी अब शहरी क्षेत्रों में पोस्ट ऑफिस धीरे धीरे अपना चेहरा खोता जा रही है लेकिन कई ग्रामीण इलाको में यह अभी लोगों के लिए चिठ्ठी पहुंचाने का जरिये बना हुआ है।

ऐसा नहीं है की समय के साथ साथ पोस्ट ऑफिस ने अपने आप को बदलने की कोशिश नहीं की है, लेकिन सरकारी सुस्थ व्यवस्था और मार्केट के कम अध्ययन के कारण लगभग 150 सालों से चली आ रही ये व्यवस्था अब दम तोड़ने लगी है। निजी कुरियर कंपनियों ने अपने आपको बाजार में कुछ इस तरह से हावी कर लिया है की अब कई निजी कंपनियां और कई अधिकारी ने अपने लेटर और कंसाईमेंट को भेजने के लिए अब इसी निजी कंपनियों के द्वारा भेजते है।


हर साल 9 अक्टूबर को विश्व डाक दिवस के रुप में मनाया जाता है। 9 अक्टूबर 1874 को "यूनिवर्सल पोस्टल यूनियन’’ के गठन हेतु बर्न, स्विटजरलैण्ड में 22 देशों ने एक संधि पर हस्ताक्षर किया था इसीकारण विश्व डाक दिवस मनाने के लिए यह दिन चुना गया। 1 जुलाई, 1876 को भारत यूनीवर्सल पोस्टल यूनियन का सदस्य बना। भारत मे मौजूदा समय में डेढ़ लाख से अधिक पोस्ट ऑफिस है, जिनमें से 89.87% ग्रामीण क्षेत्रों में है।

भारतीय डाक विभाग 9 से 14 अक्टूबर के बीच विश्व डाक सप्ताह मनाता है। 1 अक्टूबर, 1854 भारत में एक विभाग के रूप में इसकी स्थापना 1 अक्टूबर, 1854 को हुई।

अब बैंकिग की भी सुविधाए देते है पोस्ट ऑफिस

बदलते समय में अपने आप को बाजार में बनाए रखने के लिये पोस्ट ऑफिस ने अब बैकिंग सेवाएं देना भी शुरु कर दिया है। सेविंग खातो से साथ साथ पोस्ट ऑफिस अब रिकरिंग डिपोसिट और एटीएम की भी सुविधा देने लगे है, भले ही पोस्ट ऑफिस ने अपने दायरे को बढ़ाते हुए सिर्फ पत्रों तक ही सिमित नहीं रखा है , लेकिन अभी भी दम तोड़ते हुए इस दफ्तरो को लोगों तक पहुंचने में फइर से काफई समय लगेगा।


डाउनलोड करें Mumbai live APP और रहें हर छोटी बड़ी खबर से अपडेट।

मुंबई से जुड़ी हर खबर की ताज़ा अपडेट पाने के लिए Mumbai live के फ़ेसबुक पेज को लाइक करें।

(नीचे दिए गये कमेंट बॉक्स में जाकर स्टोरी पर अपनी प्रतिक्रिया दें) 

संबंधित विषय