देशभर में मानवाधिकार कार्यकर्ताओ की गिरफ्तारी का विरोध!

कई मानवधिकार संगठनों ने गिरफ्तारी के खिलाफ मोर्चा निकाला है।

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नक्सलियों के साथ संबंध रखने के आरोप में पुणे पुलिस ने  वरवरा राव, सुधा भारद्वाज, गौतम नवलखा, वर्णन गौन्साल्विस और अरूण परेरा को गिरफ्तार किया है। इसी गिरफ्तारी का विरोध भी अब होने लगा है। हालांकि कोर्ट ने इन सभी आरोपियों को घर में ही नजरबंद रखने का आदेश दिया है। हालांकि की कई मानवधिकार संगठनों का कहना है गई इन सभी लोगो को जानबूझकर गिरफ्तार किया गया है और इनपर सारे आरोप बेबुनियाद है।

कई मानवाधिकार संगठनों ने इन लोगो की गिरफ्तारी का विरोध किया है और इनके समर्थन में आज़ाद मैदान में प्रदर्शन भी किया है। इन संगठनों का कहना है की अर्थव्यवस्था, सनातन संस्था के साथ भीमा कोरेगांव में हुई हिंसा के किये जवाबदार  एकबोटे और संभाजी भिड़े ओर एफआईआर होने के बाद भी उन्हें गिरफ्तार नही किया गया। मानवधिकार कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी सिर्फ इन सभी मुद्दों से ध्यान भटकाने की कोशिश है।

पूर्व सांसद भालचंद्र मुंगेकर का कहना है की मोदी सरकार ने देश मे अघोषित इमरजेंसी लगा रखी है। इसी अघोषित इमरजेंसी के खिलाफ हुन आवाज़ उठा रहे है। सरकार लोकतंत्र की हत्या करना चाहती है। सुप्रीम कोर्ट ने भी कहा है कि लोकतंत्र में अलग विचार  रखना लोगों का अधिकार है।

क्या है मुख्य मांगे

1) देशभर में मानवाधिकार कार्यकताओ की गिरफ्तारी पर रोक लगे।

2) रवरा राव, सुधा भारद्वाज, गौतम नवलखा, वर्णन गौन्साल्विस और अरूण परेरा पर लगे सारे मामले वापस हो और भीम कोरेगांव में हिंसा के आरोपी एकबोटे और संभाजी भिड़े पर कार्यवाई हो


3) डॉ. नरेंद्र दाभोलकर, गौरी लंकेश, पानसरे और कुलबर्गी की हत्या के जिम्मेदार भगवा आतंकवादी संगठन पर पाबंदी लगे।


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