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सभी लोकल एयर कंडीशनिंग के लिए करना होगा 6 साल का इंतज़ार

मुंबई रेलवे डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन के अनुसार, कॉन्ट्रैक्ट मंज़ूर होने के बाद पहली प्रोटोटाइप ट्रेनें ढाई साल के अंदर डिलीवर होने की उम्मीद है।

सभी लोकल एयर कंडीशनिंग के लिए करना होगा 6 साल का इंतज़ार
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मुंबई अर्बन ट्रांसपोर्ट प्रोजेक्ट (MUTP) फेज़ III और III-A के तहत मुंबई को 238 ‘वंदे मेट्रो’ एयर-कंडीशन्ड लोकल ट्रेनें मिलेंगी।मुंबई रेलवे विकास महामंडल (MRVC) के मुताबिक, कॉन्ट्रैक्ट मंज़ूर होने के बाद पहली प्रोटोटाइप ट्रेनें ढाई साल में डिलीवर होने की उम्मीद है।

हर ट्रेन में 12 कोच

इन ट्रेनों की सफल टेस्टिंग के बाद, सभी ट्रेनें चार से छह साल के समय में सप्लाई की जाएंगी।मुंबई रेलवे विकास महामंडल (MRVC) ने 2,856 वंदे मेट्रो कोच खरीदने और मेंटेनेंस के लिए एक टेंडर प्रोसेस शुरू किया है।इनमें से हर ट्रेन में 12 कोच होंगे। फ्लीट शुरू में 12 और 15 कोच कॉन्फ़िगरेशन में चलेगी, जबकि भविष्य में 18-कोच वाली ट्रेनों का इंतज़ाम किया गया है।

सुरक्षा में होगा सुधार

यह पहल मुंबई के सबअर्बन रेल सिस्टम में एक बड़ा बदलाव होगी। 35 साल के कॉम्प्रिहेंसिव मेंटेनेंस अरेंजमेंट के साथ, यह प्रोजेक्ट एक लॉन्ग-टर्म पार्टनरशिप मॉडल पर आधारित है।इसमें सेफ्टी, रिलायबिलिटी और पैसेंजर की सुविधा पर ज़ोर दिया गया है। इससे रोज़ाना सफ़र करने वाले लाखों यात्रियों को फ़ायदा होगा।

डिब्बों में भीड़ कम होगी 

यह शॉर्ट-टर्म सुधारों के बजाय पूरी प्लानिंग का एक तरीका है। इसका मकसद सबअर्बन सफ़र को पूरी तरह से मॉडर्न बनाना है।MRVC के मुताबिक, इन नई ट्रेनों को यात्रियों के लिए जगह और आराम को फिर से तय करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। इससे डिब्बों में भीड़ कम होगी और भीड़ कम होगी।

छत और नीचे इक्विपमेंट लगाकर ‘स्पेस-मैक्स’ लेआउट बनाया गया है। इससे खड़े होने और बैठने के लिए ज़्यादा जगह मिलेगी।एर्गोनॉमिक मॉड्यूलर कुशन सीटें, दिव्यांगों और व्हीलचेयर यूज़र्स के लिए अलग जगहें दी गई हैं।चौड़ी खिड़कियों से स्टेशनों और आस-पास का साफ़ नज़ारा दिखेगा, जिससे सफ़र का पूरा अनुभव ज़्यादा अच्छा होगा।

यात्रियों की सेहत और आराम को ध्यान में रखते हुए स्मार्ट क्लाइमेट कंट्रोल सुविधाओं को प्राथमिकता दी गई है। भिवपुरी और वानगांव में दो नए मेंटेनेंस डिपो बनाए जाएंगे।एडवांस्ड HVAC सिस्टम में हाई-एफिशिएंसी फिल्ट्रेशन होगा और यह वायरस और बैक्टीरिया को कम करने में मदद करेगा। मुंबई जैसे बहुत ज़्यादा भीड़भाड़ वाले सफ़र के माहौल में यह एक बहुत ज़रूरी फ़ीचर है।

यात्रियों की रियल-टाइम संख्या के आधार पर ताज़ी हवा को ऑटोमैटिकली कंट्रोल किया जाएगा, जिससे कोच में माहौल ज़्यादा साफ़ और आरामदायक हो जाएगा।इन ट्रेनों के डिज़ाइन में सुरक्षा पर खास ध्यान दिया गया है। स्टैटिक और डायनामिक ऑब्सटेकल डिटेक्शन सिस्टम वाले ऑटोमैटिक स्लाइडिंग दरवाज़े लगाए गए हैं। इससे फुटबोर्ड यात्रा जैसी खतरनाक स्थितियों पर रोक लगेगी।


पूरी ट्रेन में धुआं और आग का पता लगाने और चेतावनी देने वाले सिस्टम होंगे। ऑनबोर्ड CCTV कैमरे, यात्री इमरजेंसी अलार्म और इमरजेंसी टॉक-बैक सिस्टम सुरक्षा को और मज़बूत करेंगे।बाहरी कैमरे उतार-चढ़ाव की रियल-टाइम निगरानी कर सकेंगे, जबकि हाई-विज़िबिलिटी वाले बाहरी LED डिस्प्ले पर मंज़िल, रेक की लंबाई और तेज़/धीमी स्थिति साफ़-साफ़ दिखेगी।


मुंबई के मुश्किल मौसम के हालात पर भी खास तौर पर ध्यान दिया गया है। एनर्जी बचाने वाली सिलिकॉन कार्बाइड ट्रैक्शन टेक्नोलॉजी गर्मी पैदा करने और बिजली की खपत को कम करेगी, जबकि रीजेनरेटिव ब्रेकिंग ओवरहेड सिस्टम में एनर्जी वापस भेजेगी।

पानी से बचाने वाला स्ट्रक्चर, बाढ़ से बचाने वाला अंडरफ्रेम कंपोनेंट, एंटी-करोशन एंटी-सलाइन कोटिंग और एडवांस्ड साउंड-प्रूफिंग टेक्नोलॉजी तटीय इलाकों में टिकाऊपन और आराम पक्का करेगी।ये नेक्स्ट-जेनरेशन ट्रेनें मुंबई के भीड़भाड़ वाले नेटवर्क के लिए बनाई जा रही हैं। 130 kmph की टॉप स्पीड से शेड्यूल पूरा करना आसान हो जाएगा।


स्टेट-ऑफ-द-आर्ट ट्रैक्शन टेक्नोलॉजी एनर्जी एफिशिएंसी बढ़ाएगी और कार्बन फुटप्रिंट कम करेगी। एयर-स्प्रिंग सेकेंडरी सस्पेंशन तेज़ स्पीड पर भी यात्रा को आसान और ज़्यादा आरामदायक बना देगा।डिजिटल पैसेंजर इकोसिस्टम में USB चार्जिंग पोर्ट, इंफोटेनमेंट, वाई-फाई, पैसेंजर इन्फॉर्मेशन सिस्टम और रियल-टाइम गाइडेंस के लिए डायनामिक रूट मैप होंगे।

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