SHARE

'हाउसिंग फॉर ऑल' और 'वहनीय आवास' के खोखले जनवादी दावों के बीच, राज्य सरकार एक बार फिर 1,400 गरीब दलित और मुस्लिम परिवारों के घरों को ध्वस्त करने की धमकी दे रही है। दो झुग्गी इलाके - विखरोली में कन्नमवार नगर में भिमचया और ट्रॉम्बे में चीता शिविर में बने कई घरों को राज्य सरकार सोमवार को तोड़ने जा रही है।


यह भी पढ़े- मुकेश अंबानी की बेटी ने की सगाई, इस बिजनसमैन से करेंगी शादी

भिमचया 800 परिवारों के साथ एक दलित बहुसंख्यक समुदाय है जबकि चीता शिविर 600 परिवारों के साथ एक मुस्लिम बहुमत समुदाय है। महाराष्ट्र वन विभाग द्वारा इन घरों को तोड़ा जाएगा। फ्रि प्रेस जनरल में छपी खबर के अनूसार गैर-सरकारी संगठन, 'घर बचाओ घर बनो आंदोलन' के बिलाल खान ने कहा, "सरकार का दावा है कि इन क्षेत्रों को वन के रूप में अधिसूचित किया गया है और उन्हें अतिक्रमण से मुक्त करने की आवश्यकता है, । हालांकि, कानून की उचित प्रक्रिया के बिना और शिकायत निवारण के लिए पर्याप्त प्रावधान किए बिना, वन विभाग ने चीता शिविर के विध्वंस की घोषणा की है और फिर इसके बाद भिमछाया में भी घर तोड़े जाएंगे। प्रभावित परिवारों को विध्वंस की कोई सूचना नहीं दी गई है।

यह भी पढ़े- फोर्ट और मरीन ड्राइव को मिल सकता है यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज साइट का दर्जा

ये झोपड़ियां महाराष्ट्र स्लम अधिनियम के अनुसार संरक्षित हैं लेकिन वन विभाग ने इन क्षेत्रों को 'आरक्षित वन' के रूप में अधिसूचित किया है और संरक्षित झोपड़पट्टी के निवासियों के पुनर्वास के लिए इनकार करके झोपड़पट्टियों के आवास अधिकारों का अनादर कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि चीता शिविर का स्थानीय पुलिस स्टेशन मुस्लिम युवाओं को आतंकित कर रहा था और अगर वे विध्वंस अभियान का विरोध करने की कोशिश कर रहे थे तो उन्हें गंभीर परिणामों से धमकी दे रही थी।

संबंधित विषय
ताजा ख़बरें