BCCI के डोप टेस्ट प्रोग्राम पर सरकार ने उठाया सवाल, बताया अवैधानिक

आपको बता दें कि मंगलवार को बीसीसीआई ने पृथ्‍वी शॉ को डोप टेस्‍ट में फेल होने के कारण आठ महीने यानी 15 नवंबर 2019 तक सस्‍पेंड कर दिया।

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युवा बल्‍लेबाज पृथ्‍वी शॉ के डोप टेस्‍ट में फेल होने के बाद उन पर लगाये गये बैन को लेकर सरकार ने सवाल उठाये हैं। सवाल भारतीय क्रिकेट बोर्ड (BCCI) द्वारा की जाने वाली डोपिंग टेस्ट पर भी उठ रहे हैं। दरअसल बीसीसीआई के एंटी डोपिंग प्रोग्राम में काफी खामियां हैं, साथ ही बीसीसीआई के एंटी डोपिंग टेस्ट वर्ल्‍ड एंटी डोपिंग एजेंसी (वाडा) के तहत भी नहीं आता। इस मामले में कुछ दिन पहले ही खेल मंत्रालय की ओर से बीसीसीआई सीईओ राहुल जौहरी को कड़े शब्‍दों में पत्र लिखा गया था।

'डोप टेस्ट का अधिकार नहीं है BCCI के पास'
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार बीसीसीआई एंटी डोपिंग प्रोग्राम के तहत खुद ही खिलाड़ियों का टेस्‍ट लेता है और खुद ही सजा देता है। जबकि बीसीसीआई को डोप टेस्‍ट कराने का अधिकार नहीं है क्योंकि बीसीसीआई का डोप टेस्‍ट न तो भारत सरकार और न वर्ल्‍ड एंटी डोपिंग एजेंसी (वाडा) के तहत ही रजिस्टर्ड है।

अधिकृत एंटी डोपिंग संगठन को है अधिकार 
वाडा के नियमानुसार खिलाड़ियों के डोप टेस्ट का अधिकार अधिकृत एंटी डोपिंग संगठन के पास ही होता है। तथ्‍य यह है कि बीसीसीआई न तो वाडा के तहत कोई एंटी डोपिंग संगठन है और इसके पास ऐसी कोई ताकत है।

BCCI और नाडा के बीच टकराव
यही नहीं बीसीसीआई अभी तक नेशनल एंटी डोपिंग एजेंसी (नाडा) से भी नहीं जुड़ा है जबकि देश में बाकी खेलों के खिलाड़ी नाडा के तहत आते हैं। बीसीसीआई का मानना है की नाडा के नियमों में कई खामियां है इसीलिए वह उसके साथ नहीं जुड़ेगी, और बीसीसीआई सरकारी मदद से चलने वाली नेशनल फेडरेशन नहीं है तो यह नाडा के अधिकार क्षेत्र में भी नहीं आती।

आपको बता दें कि मंगलवार को बीसीसीआई ने पृथ्‍वी शॉ को डोप टेस्‍ट में फेल होने के कारण आठ महीने यानी 15 नवंबर 2019 तक सस्‍पेंड कर दिया। बीसीसीआई के मुताबिक पृथ्वी ने गलती से एक खांसी की दवा ले ली जो कि एंटी डोपिंग के तहत प्रतिबंधित है।

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