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अभी तक आपने केवल या फिल्मों में ही देखा होगा कि अपने दिवंगत पिता के माथे पर लगे रिश्वत के कलंक को धोने के लिए हीरो आखिरी दम तक लड़ता है और अंत में जीत हासिल करता है। ठीक इसी तरह का एक मामला  रियल लाइफ में भी सामने आया है। इस मामले के मुताबिक़ 32 साल पहले एक डॉक्टर पर घुस लेने का आरोप लगा था, जिसे बॉम्बे हाई कोर्ट ने मंगलवार को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया। हालांकि, 2015 में ही डॉक्टर इस दुनिया से चल बसा।

आपको बता दें कि डॉक्टर निशिकांत कुलकर्णी मनमाड म्युनिसिपल हॉस्पिटल में मेडिकल ऑफिसर थे। साल 1987 में डॉक्टर निशिकांत कुलकर्णी पर आरोप लगा था कि उन्होंने 100 रुपये लेकर एक जन्म प्रमाणपत्र जारी किया था। इसके शिकायतकर्ता मनोहर मूलचंदानी ने एसीबी (ऐंटी करप्शन ब्यूरो) में डॉक्टर कुलकर्णी के खिलाफ रिश्वत की शिकायत दर्ज कराई थी। एसीबी ने डॉक्टर के चपरासी  को भी इस मामले में गिरफ्तार किया। साल 2005 में सत्र न्यायालय ने डॉ. कुलकर्णी और चपरासी को दोषी मानते हुए उन्हें एक साल और छह महीने की जेल की सजा सुनाई।

लेकिन डॉक्टर की दो बेटियों और उनकी पत्नी ने यह लड़ाई जारी रखते हुए इसे आगे ले गए। बॉम्बे हाईकोर्ट में इसकी सुनवाई हुई और मंगलवार को इस सुनवाई में जज ने डॉ. कुलकर्णी के खिलाफ पेश किये गए सबूत को अपर्याप्त मानते हुए उन्हें आरोपों से बरी कर दिया।

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