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PMC बैंक के पहले इन बैंको में भी हुए घोटाले

इन बैंको में घोटालों के चलते कई बार आम ग्राहकों में भी उनके पैसो को लेकर भ्रम का माहौल फैला है

PMC बैंक के पहले इन बैंको में भी हुए घोटाले
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पीएमसी बैक पर पाबंदी के बाद कई ग्राहकों के सामने अब एक बड़ा सवाल खड़ा हो गया है।  बैंक में जमा पैसों को लेकर बैंक के ग्राहकों में चिंता बढ़ गई है।  लेकिन पीएमसी ऐसा पहला बैंक नहीं है जिसे लेकर ग्राहकों को इतनी चिंता हो रही है इसके पहले भी कई ऐेसे बैंक है जिनकी वजह से ग्राहको को काफी तकलीफों का सामना करना पड़ा है


लक्ष्मी विलास बैंक- रिजर्व बैंक ने निजी क्षेत्र के लक्ष्मी विलास बैंक की कमजोर वित्तीय स्थिति के मद्देनजर उसके खिलाफ त्वरित सुधारात्मक कार्रवाई (पीसीए) व्यवस्था के तहत कर्ज आदि देने संबंधी कई पाबंदियां लगा दी हैं। केंद्रीय बैंक ने इस बैंक के अवरुद्ध ऋणों के उच्च स्तर, जोखिम से बचाव के लिए पर्याप्त पूंजी के अभाव तथा दो लगातार साल से संपत्तियों पर नुकसान के मद्देनजर यह कदम उठाया है। पीसीए के तहत लक्ष्मी निवास बैंक पर ऋण देने, नयी शाखाएं खोलने तथा लाभांश का भुगतान करने पर रोक लग गयी है। बैंक को चुनिंदा क्षेत्रों को दिये ऋण में कमी लाने पर भी काम करना होगा। लक्ष्मी विलास बैंक ने शनिवार को नियामक को इसकी जानकारी दी।


पीएनबी- 11,400 हजार करोड़ का पीएनबी घोटाला देश का सबसे बड़ा बैंकिंग घोटाला है। इसका मुख्य आरोपी  नीरव मोदी है जो देश छोड़कर भाग गए हैं। इसमें नीरव के मामा मेहुल चौकसी भी शामिल हैं। धोखाधड़ी के आरोप में प्रवर्तन निदेशालय नीरव मोदी और मेहुल चोकसी के खिलाफ जांच कर रहा है। 


सहारा घोटाला- 31 अगस्त 2012 को सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि ग्रुप द्वारा चलाई जा रही दो फाइनैंस स्कीम गैर-कानूनी हैं, लिहाजा ग्रुप को इन्वेस्टर्स की रकम ब्याज सहित लौटानी होगी। दोनों फाइनैंस फर्मों ने इस दावे के साथ छोटे इन्वेस्टर्स को बॉन्ड्स बेचे थे कि 10 साल बाद फेस वैल्यू का तीन गुना फायदा मिलेगा। सेबी का कहना है कि सहारा ने 2.7 करोड़ इन्वेस्टर्स से 27,000 करोड़ रुपए जुटाए थे। सहारा ने पहले कहा कि इस पैसे को 63 शहरों में रियल एस्टेट प्रॉजेक्ट्स में इन्वेस्ट किया गया है। बाद में दावा करने लगी थी कि उसने पूरे पैसे लौटा दिए हैं और सिर्फ 5,000 करोड़ रुपए की बाकी रकम लौटाई जानी है। 

आरपी इन्फोसिस्टम बैंक घोटाला -इस मामले में सीबीआई जांच कर रही है। आरोप है कि आरपी इन्फोसिस्टम कंपनी ने फर्जी दस्तावेजों का उपयोग करके 515 करोड़ का कर्ज लिया और बाद में लौटाने से इनकार कर दिया। यह घोटाला कोलकाता का है और इसमें आईडीबीआई बैंक को भी चूना लगाया गया है।

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