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लॉकडाउन में ई-लर्निंग, धारावी के बच्चों के पास स्मार्ट फोन नहीं, कंप्यूटर दूर की कौड़ी

सरकार यह नियम लागू करते समय यह भूल गयी कि, कितने बच्चों के पास ई-लर्निंग की सुविधा है, और कितने बच्चे इस सुविधा से मरहूम हैं।

लॉकडाउन में ई-लर्निंग, धारावी के बच्चों के पास स्मार्ट फोन नहीं, कंप्यूटर दूर की कौड़ी
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देश मे कोरोना वायरस (Coronavirus) के आगमन के बाद लॉकडाउन (lockdown) लगा दिया गया, जिसके तहत सभी क्षेत्रों को बंद कर दिया गया। जिसमें शिक्षा क्षेत्र में स्कूल और कॉलेजों को भी बंद कर दिया गया। जब नए सत्र की शुरुआत हुई तो सरकार ने स्कूलों से ई-लर्निंग (E-learning) प्रकिया पर जोर देने को कहा, जिसमें टीचर्स बच्चों को ऑनलाइन (online study) ही पढ़ाने का निर्देश दिया गया था। लेकिन सरकार यह नियम लागू करते समय यह भूल गयी कि, कितने बच्चों के पास ई-लर्निंग की सुविधा है, और कितने बच्चे इस सुविधा से मरहूम हैं।

अंग्रेजी अखबार मिड डे की एक रिपोर्ट के अनुसार, धारावी (dharavi) के झुग्गी झोपड़ी में रहने वाले लगभग 60 फीसदी गरीब बच्चों के पास ऑनलाइन पढ़ाई का कोई साधन नहीं है, इन बच्चों के गरीब परिवार वालों के पास स्मार्ट फोन तक नहीं है कम्प्यूटर (Computer) दूर की कौड़ी है। इसिलए इन बच्चों के सामने पढ़ाई की समस्या खड़ी हो गई है।

कोरोना महामारी (COVID-19 pandemic) के बीच, धारावी (dharavi) में रहने वाले अधिकांश परिवारों के सामने जीवन यापन की समस्या आ गई है। तो ऐसे में अधिकांश परिवार वालों के सामने जहां 2 जून की रोटी की जुगत करने में मुश्किल आ रही है तो वहीं वे डिजिटल दूनिया से उनका कोई संबंध ही नहीं है।

मिड-डे की एक रिपोर्ट के मुताबिक, इनमें से ज्यादातर छात्र बनयान ट्री इंग्लिश स्कूल के हैं, जो माटुंगा लेबर कैंप के पास है। इसके अलावा अधिकांश बच्चे दैनिक मजदूरी करने वाले मजदूरों के घर से आते हैं। जिनके लिए ऑनलाइन कक्षाओं सुविधा प्राप्त करना आर्थिक रूप से संभव नहीं है।

रिपोर्टों के अनुसार, हालांकि स्कूल वर्तमान में इन गरीब बच्चों की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं होने के कारण इन्हें 200 रुपये प्रति वर्ष की सब्सिडी शुल्क पर शिक्षा प्रदान करता है, लेकिन मजदूरों के लिए इस सरकारी स्कूल की फीस देना भी काफी मुश्किल भरा साबित होता है।

महाराष्ट्र सरकार ने पहले प्री-प्राइमरी के छात्रों के लिए ऑनलाइन कक्षाओं की अनुमति दी थी, जिसके तहत एक या दो बच्चों को सप्ताह में पांच दिन 30 मिनट का सत्र लिया जाता है।

देश के माहौल को देखते हुए अनेक राज्यों के पैरेंट्स कोरोनो वायरस (Coronavirus) के प्रकोप के कारण अपने बच्चों को वापस स्कूल भेजने में हिचकिचाहट महसूस करते हैं। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सभी राज्यों में शैक्षणिक संस्थानों में तालाबंदी खत्म होने के बाद स्कूल अपने छात्रों की सुरक्षा के लिए सोशल डिस्टेंस (social distance) जैसे प्रोटोकॉल को कैसे बनाए रखते हैं?

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