शहीद सिपाही की पत्नी स्वाती महादिक की प्रेरणादायक कहानी 10 वीं मराठी पाठ्यपुस्तक में पढाई जाएगी

11 महीने की ट्रेनिंग के बाद 38 वर्षीय स्वाती एक अधिकारी के रूप में सेना में शामिल हुई

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आगामी शैक्षणिक वर्ष से मराठी पाठ्यपुस्तकों में एसएससी छात्रों को शहीद कर्नल संतोष महाडिक की पत्नी स्वाती महादिक के साहस और प्रेरणादायक कहानीको पढ़ाया जाएगा। तीन साल पहले, कर्नल संतोष महादिक जम्मू कश्मीर में आतंकवादियों के साथ एक मुठभेड़ में शहीद हो गये थे। 11 महीने की ट्रेनिंग के बाद 38 वर्षीय स्वाती एक अधिकारी के रूप में सेना में शामिल हुई है, उसके बाद उन्हे पुणे में सेना ऑर्डिनेंस कोर में तैनात किया गया।


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जब सैनिक संतोष महादिक आतंकवादियों से लड़ते हुए शहीद हो गये थे, उसके बाद उनकी धर्मपत्नी स्वाती महादिक ने रोते हुए दिन नहीं बिताया, बल्कि उनके सपने को पूरा करने के लिए उन्होन सेना में जुड़ने का फैसला किया। स्वाति महादिक की यह कहानी एसएससी की मराठी पाठ्यपुस्तक में शामिल की जाएगी।

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