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OTT प्लेटफॉर्म पर प्रतिबंध लगाना कितना सही?


OTT प्लेटफॉर्म पर प्रतिबंध लगाना कितना सही?
Photo credit : meri saheli
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भारत युवाओ का देश है, और यहां के युवा बदलाव को बहुत जल्द स्वीकार कर लेते हैं। पिछले कुछ सालों से ऐसे कई सारी कंपनियां हैं जिन्होंने मनोरंजन ऐप बनाया है और उसी ऐप में यानी OTT प्लेटफॉर्म पर मूवीज या लंबी मूवीज को वेब सीरीज के रूप में प्रदर्शित करते हैं। फिल्मों के इस बदलते स्वरूप ने युवाओं के मन में जल्द ही जगह बना ली। इसका एक कारण यह भी है कि, इन फिल्मों के कंटेंट काफी स्ट्रांग और डायलाग काफी बोल्ड होते हैं, जो दर्शकों खास कर युवाओ को काफी पसंद आते हैं।

और अब तो बड़े बड़े सेलेब्रिटीज़ भी वेब सीरीज़ में काम कर रहे हैं, जिनसे आज के युवाओं इस डिजिटल की लोकप्रियता और भी बढ़ी है। बताया जाता है कि, वेब श्रृंखला ने देश में 60 प्रतिशत से अधिक वर्ग को आकर्षित किया है।

कोरोना काल में जब सभी फ़िल्म थियेटर बंद थे तो सभी फिल्में इसी OTT प्लेटफॉर्म पर रिलीज हो रही हैं। चूंकि यह एक डिजिटल माध्यम है, जिस पर कोई सेंसर नहीं है, इसलिए इस माध्यम के द्वारा बड़े पैमाने पर अश्लीलता और द्विअर्थी डायलाग दिखाई और बोले जाते हैं।

लेकिन अब इन OTT प्लेटफॉर्म्स पर सवाल उठ रहे हैं। लोग आरोप लगा रहे हैं कि, फिल्मों की आड़ में अश्लीलता को बढ़ावा मिल रहा है। 

इसलिए इसके दुष्प्रभाव भी बढ़ रहे हैं। कई लोग इसे देश की संस्कृति के साथ खिलवाड़ और युवाओं के लिए दुष्परिणाम बता रहे हैं।

दूसरी बात यह है कि, आज हर इंसान के हाथ में मोबाइल है, नेट है। छोटे बच्चों से लेकर बूढ़े और स्त्री-पुरुष सभी मोबाइल रख रहे हैं। हर घर में मोबाइल की पहुंच काफी आसान हो गई है। भारत जैसे जनसंख्या बहुल देश में डिजिटल मनोरंजन का एक बहुत बड़ा बाजार है। तो ऐसे में कौन बच्चा क्या देख रहा है, उसका उस पर क्या असर पड़ रहा है? पैरेंट्स को यह समझना आसान नहीं है।

यही कारण है कि, सरकार ने उन सभी निर्माता, निर्देशक और अभिनेताओं के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करना शुरू कर दिया, जो वेब सीरीज केे नाम सेे ओटीटी प्लेटफॉर्म पर अश्लील वीडियो और द्वीअर्थी शब्दों का इस्तेमाल करते हैं।

हालांकि वेब सीरीज़ के माध्यम से हर किसी को अपनी पसंद का कंटेंट देखने को मिल रहा है, लेकिन वेब सीरीज़ पर दिखाए जा रहे बोल्ड सीन्स बोल्डनेस की सारी हदें पार कर रहे हैं. गालियों और डबल मीनिंग से भरपूर डायलॉग्स, खुल्लमखुल्ला सेक्स परोसते बोल्ड सीन्स, लेसबियन, गे संबंध के नाम पर नग्नता की हदें पार करतीं कहानियां, एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर, मारधाड़, गोलियों की बौछार… वेब सीरीज़ में वो सब कुछ दिखाया जा रहा है, जिन्हें फिल्मों या टीवी सीरियल में दिखाने की मनाही है. 

वर्तमान में कई सारे ओटीटी प्लेटफॉर्म्स की भरमार सी आ गई है जो एक के बाद एक कई सारे वेब सीरीज प्रदर्शित करते हैं। जिनमें अश्लील दृश्यों की भरमार होती है। यही कारण है कि अब लोग डिजिटल सेंसर की भी मांग कर रहे हैं।

हालांकि ऐसे लोग कानूनी कार्रवाई से बचने के लिये शुरू में एक डिस्क्लेमर या चेतावनी दिखा देते हैं, लेकिन उसे दर्शक कितना पढ़ते हैं, यह सभी जानते हैं।

यही नहीं अभी कुछ महीने पहले महाराष्ट्र की साइबर पुलिस ने सात OTT प्लेटफॉर्म के खिलाफ केस भी दर्ज किया। इन पर आरोप लगा कि ये सभी वेब सीरीज के नाम पर दर्शकों को अश्लीलता परोसने का काम कर रहे थे।

महाराष्ट्र साइबर पुलिस ने इन सभी प्लेटफॉर्म्स पर अश्लील वीडियो दृश्य बनाने के लिए आईपीसी की धारा 292, 67, 67 (ए) के तहत मामला दर्ज किया है। साथ ही इनके खिलाफ आईटी एक्ट 2000 के तहत अपराध दर्ज किया गया है।

पुलिस ने जिन OTT प्लेटफॉर्म्स के खिलाफ मामला दर्ज किया है, उनमें हॉटसूट, नियोफ्लिक्स, फ़्लिज़ मूवी, फेनियो, क्यूको, उल्लू, हंटमस्ति, चीकू फ़्लिक्स, ऑल्ट बालाजी, प्राइमफ़्लिक्स शामिल है।

डिजिटल अश्लीलता को रोकने के लिए केंद्र सरकार ने पिछले साल ही सैकड़ो पोर्न साइट्स पर प्रतिबंध लगाया था। कहा गया कि सरकार के इस निर्णय से यौन उत्पीड़न में कमी आएगी। लेकिन इन साइटों ने दूसरे नाम से फिर अपनी उपस्थिति दर्ज करा ली है। साथ ही इन साइटों का बाजार इतना बड़ा है और नेट कंपनियां इन सभी से इतना पैसा कमा रही हैं, इन्हें बंद करना लगभग नामुमकिन सा है। 

हालांकि अब इन OTT प्लेटफॉर्म्स के खिलाफ नेताओं के भी स्वर मुखर हो रहे हैं। BJP नेता और सांसद गोपाल शेट्टी में इसी साल 20 अप्रैल को दिल्ली से सेंटर फॉर नॉलेज सोवरनटी के सचिव व CRIS के सदस्य विनीत गोयनका से OTT प्लेटफॉर्म्स के खिलाफ शिकायत की। इस शिकायत में अनेक चेनल/प्रसारण कम्पनियों के द्वारा इंटरनेट के जरिए प्रसारित हो रही फिल्म,वेब सीरीज अत्यंत चर्चा का विषय बनी हुई है। नेटफ्लिक्स, अमेज़न प्राइम, जी5, अल्ट बालाजी, हॉटस्टार जैसे कई कंपनियां बिना किसी नियम व कानून के बगैर धड़ल्ले से फ़िल्म और वेब सीरीज का प्रसारण धड़ल्ले से कर रही हैं।

यही नहीं सांसद शेट्टी ने 20 अप्रैल 2020 को ही केंद्रीय सूचना प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर को भी इस विषय पर एक पत्र लिखा।

इस पत्र में सांसद गोपाल शेट्टी ने OTT प्लेटफॉर्म को सेंसरशिप के दायरे में लाने की आवश्यकता की बात कही । 

इस पत्र में शेट्टी ने लिखा था कि, पूरे जनमानस की मानसिक तंदुरस्ती को ध्यान में रखते हुए , देश की कानून व्यवस्था को बनाए रखने के लिए यह अति आवश्यक है कि, इन फिल्मों और वेब सीरीज के विषय वस्तु बीभत्स, हेट स्पीच,नग्नता, आपत्तिजनक दृश्य एवम् घटनाक्रम से लिप्त होने के कारण, एवम् यह अति सरलता से देखने के किए उपलब्ध होने के कारण समाज में कानून व्यवस्था को बिगाड़ने में कारणभूत होती है। अतः इस पर सूचना प्रसारण मंत्रालय विशेष ध्यान दें एवम् अपनी अंकुश सीमा में समाविष्ट करें ।

इस पर कार्रवाई करते हुए संबंधित मंत्रालय ने कहा कि, ऐसे देश/ समाज एवम् विशेषतः युवा पीढ़ी के लिए हानिकारक होते हैं। अतः ऐसे विषय पर संज्ञान लेकर दिनांक 11 नवम्बर 2020 को आदेश जारी कर OTT के प्रत्येक विषय मालिका/समाचार/ सिनेमा/वेब सिरीज़ व अन्य जो भी हो, वह सूचना प्रसारण मंत्रालय के अंकुश/निगरानी में समाविष्ट किया है।

तो वहीं कई लोग इस सेंसर के खिलाफ भी हैं। उनका कहना है कि, अब लोग बदल रहे हैं, मनोरंजन का माध्यम बदल रहा है तो ऐसे में हम सभी को यह साधन स्वीकार करना पड़ेगा। साथ ही लोगों को इस बात की स्वतंत्रता होनी चाहिए कि वे क्या देखना चाहते हैं। और वैसे भी समाज में तो गाली गलौज और खुलापन तो चल ही रहा है। अगर जिन्हें इन फिल्मों और वेब सीरीज में अश्लीलता नजर आती है वे न देखे। और जिन्हें देखना है तो देख सकता है। वैसे भी यह अपने विवेक पर निर्भर करता है कि, आप क्या चाहते हैं?

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