मुंबई की हवा में है जहर, बीएमसी कर रही यह यह उपाय

हर साल 5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस के तौर मनाया जाता है। पर्यावरण दिवस का महत्व केवल 5 जून तक ही सीमित नहीं रहना चाहिए। जिस तरह से भोजन और पानी जरुरी है उसी तरह से पर्यावरण भी काफी जरुरी है। मुंबई, भारत की ही नहीं बल्कि दुनिया के 95 फीसदी देश प्रदुषण से

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बीएमसी ने बुधवार को एक अच्छी पहल करते हुए यह ऐलान किया था कि अब मुंबई शहर के 5 स्थानों पर जंगल उगाये जाएंगे। ताकि मुंबई में प्रदुषण कम हो सके और विकास के नाम पर जो पर्यावरण को नुकसान पहुंचाया जा रहा है उसकी कुछ तो पूर्ती हो सके। यही नहीं इससे आम लोगों को फ्रेस हवा भी मिल सकेगी। अगर ऐसा होता है तो बीएमसी के बार में यह कहा जा सकता है कि उसका यह कदम काफी सरहनीय है।

हर साल 5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस के तौर मनाया जाता है। पर्यावरण दिवस का महत्व केवल 5 जून तक ही सीमित नहीं रहना चाहिए। जिस तरह से भोजन और पानी जरुरी है उसी तरह से पर्यावरण भी काफी जरुरी है। मुंबई, भारत की ही नहीं बल्कि दुनिया के 95 फीसदी देश प्रदुषण से जूझ रहे हैं।

भारत देश के अधिकांश शहर प्रदुषण की चपेट में है। दिल्ली की स्थिति किसी से छुपी नहीं है। रिपोर्ट के अनुसार दिल्ली की हवा इतनी प्रदूषित हो चुकी है कि वहां कैंसर सहित अन्य बीमारियां होने की सम्भावना सबसे अधिक है। दिल्ली ही नहीं यही स्थिति अन्य शहरों की भी है।

मुंबई के पर्यावरण की बात करें तो यहां 87 किलोमीटर में फैला नेशनल पार्क जैसा एक बड़ा जंगल है। हालांकि यह जंगल भी अतिक्रमण का शिकार हो चुका है। फिर भी इसे मुंबई का ह्रदय कहते हैं जो यहां की हवा को शुद्ध रखता है। लेकिन पिछले कुछ सालों से विकास के नाम पर यहां हजारों पेड़ काटे जा चुके हैं। अपने प्राकृतिक वातावरण की सुरक्षा और प्राकृतिक संसाधनों के प्रबंधन की कठिनाइयों से हम गुजर रहे हैं। 

कभी अतिवृष्टि और कभी अनावृष्टि झेल रही यह दुनिया प्रकृति का प्रकोप झेल रही है। मुंबई में जिस तरह से आबादी बढ़ रही है एक तरह से यह जनसंख्या विस्फोट है। यह जनसंख्या बेतरतीब तरीके से बस जाती है जिसका खामियाजा पर्यावरण को भुगतना पड़ता है। यही नहीं इसी जनसंख्या को बसाने के लिए समुद्रों, नालों, खाड़ी को पाट कर उंची-उंची कांक्रीट के जंगल खड़े किये जा रहे हैं। बड़े पैमाने पर मैन्ग्रोव्ज को काटा जा रहा है, जिसका असर पर्यावरण भी पड़ता है।

इसका एक बड़ा कारण राजनीतिक कारण भी है। वोटों की खातिर समुद्रों में निर्माण करवाना जैसे काम भी पर्यावरण के लिए खतरा बनते जा रहे हैं। जिस तरह से मेट्रो काम के लिए बड़ी संख्या में और पुराने पेड़ों को काटा गया उससे पर्यावरण को काफी क्षति पहुंची है। मुंबई की सड़कों पर बेहिसाब संख्या में जिस तरह से गाड़ियों की संख्या बढ़ रही हैं वह भी चिंता का विषय है। लेकिन इस तरह सरकार ज़रा भी ध्यान नहीं दे रही है। 

एक चौकानें वाला आंकड़ा यह भी है कि ग्रीनपीस इंडिया की वायु गुणवत्ता पर आधारित रिपोर्ट 'ऐरपोकैलिप्स' के अनुसार प्रति वर्ष वायु प्रदूषण से, देश में करीब 12 लाख लोग अपनी जान गवां रहें हैं। पर्यावरण का हमारे जीवन से सामंजस्य और हमारी संसाधन पूर्ति में पर्यावरण का बढ़ता क्षय, इसी बात से सिद्ध होता है। ऐसे में ये अनिवार्य हो जाता है कि हम अपनी आधुनिकता और आपूर्ति सुनियोजन के प्रयत्नों में पर्यावरण संरक्षण का खास प्रावधान रखें। जहां मांग में वृद्धि के जवाब में भारत की ऊर्जा उत्पादन में और बढ़ोतरी होने की उम्मीद है वहीं इस क्षेत्र के पर्यावरणीय प्रभाव को कम करना अब एक जरूरी आवश्यकता बन चुका है।

तो ऐसे में बीएमसी की इस पहल को काफी सराहनीय कहा जा सकता है। ऐसा होने पर लोगों को हरियाली का आनंद तो मिलेगा ही साथ ही पर्यावरण में सुधार भी होगा। बीएमसी की इस पहले से अन्य राज्यों की सरकारों को भी सीख लेनी चाहिए।वर्ना वह दिन दूर नहीं जब यहां की हवा में इतना जहर घुल जाएगा कि हर आदमी बीमार बहुत बीमार हो जाएगा।

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