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गणपति विशेष- बाप्पा के कई रुप, कही पानीपूरी के ,तो कही लकड़ी के!

गणेशोत्सव के दौरान बाप्पा की अलग अलग तरह की मुर्तियों को बनाया जाता है , जिनमें ट्री गणेशा से लेकर लकड़ी और पानीपुरी से भी बनी गणपति की मुर्तियां होती है।

गणपति विशेष- बाप्पा के कई रुप, कही पानीपूरी के ,तो कही लकड़ी के!
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मुंबई सहीत पूरे देश में गणेशोत्सव बड़े ही धूम धाम से मनाया जाता है। बाप्पा की अलग अलग तरह से बनी मुर्तियों को पंडालों में बैठाया जाता है। जिनमें ट्री गणेशा से लेकर लकड़ी और पानीपुरी से भी बनी गणपति की मुर्तियां होती है। मालाड पश्चिम में श्याम निर्मल मित्रा मंडल ने 9 फिट की गणपति बनाई है। लेकिन गणपति पीओपी की नहीं बल्की पानीपुरी (गोलगप्पा) में इस्तेमाल किए जाने वाले सभी खाद्य पदार्थ को मिलाकर बनाया गया हैं।


इस गणपति में 3500 पानीपुरी, 9 किलों मूंग दाल, 2.5 किलों मटर, 4.5 किलों खजूर, 2 किलों चना, आलू 3.5 किलों, 1 किलों ईमली, 1किलों बूंदी, आधा किलो मिर्ची, और पुदीना इस्तेमाल किया गया हैं, साथ ही गणेश जी की प्रतिमा से बड़े ही सुंदर तरीके से पानी निकलता हुआ दिखाया गया हैं।


लकड़ी के बाप्पा

मालाड के ही श्री साई दर्शन मित्र मंडल ने इस साल लकड़ी के बने बाप्पा की स्थापना की है। इस मंडल की स्थापना 1951 में की गई , इस साल मंडल को 67साल हो गए है। इसके मद्देनजर, मंडल ने पेड़ की सजावट करके लोगों को पर्यावरण के प्ति जागरुक करने की एक कोशिश की है।



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