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कोरोना से बचने के लिए लोग शरीर में लगा रहे हैं गाय का गोबर और पी रहे हैं गौमूत्र, डॉक्टरों ने दी चेतावनीं

यूएस के डॉ फहीम यूनुस ने एक ट्वीट कर कहा कि, भारत में गाय के गोबर का उपयोग 'कोविड इलाज' के रूप में घातक ब्लैक फंगस का कारण हो सकता है।

कोरोना से बचने के लिए लोग शरीर में लगा रहे हैं गाय का गोबर और पी रहे हैं गौमूत्र, डॉक्टरों ने दी चेतावनीं
Pic source : Reuters
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अभी हाल ही में गुजरात और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों से खबर आई थी कि, कुछ लोग कोरोना वायरस (Coronavirus) जैसी महामारी से बचने के लिए शरीर में गाय को गोबर (cow dung) लगा रहे हैं और गौमूत्र का सेवन कर रहे हैं, ऐसे लोगों को यह विश्वास है कि इससे उनके शरीर की इम्युनिटी (immunity) बढ़ेगी और वे कोरोना जैसी महामारी से बचे रहेंगे। हालांकि ऐसा करने से शरीर की इम्युनिटी बढ़ती है, वैज्ञानिकों को इस बात की पुख्ता सबूत नहीं मिले हैं, लेकिन हां, डॉक्टरों ने ऐसा करने वालों के स्वास्थ्य को ध्यान में रखकर चेतावनी जरूर दी है।

डॉक्टरों ने लोगों द्वारा अपने शरीर पर गोबर या मूत्र रगड़ने की खबरों पर चिंता जताई है। उन्होंने इस "गोबर थेरेपी" (dung therapy) की विश्वसनीयता ओर भी सवाल उठाते हुए कहा, इसका कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है।

डॉक्टरों का कहना है कि तथाकथित चिकित्सा संभवतः उन लोगों में "ब्लैक फंगस" (black fungus) म्यूकोरमायकोसिस के मामलों को और भी बढ़ा सकती है जिन्हें कोविड के उपचार के दौरान स्टेरॉयड दिया गया था या जो शुगर के मरीज हैं।

इस चिकित्सा को लेकर यूएस के डॉ फहीम यूनुस ने एक ट्वीट कर कहा कि, भारत में गाय के गोबर का उपयोग 'कोविड इलाज' के रूप में घातक ब्लैक फंगस (mucormycosis) का कारण हो सकता है। 

बता दें कि डॉ फहीम को कोविड -19 के विशेषज्ञ के रूप में जाना जाता है। इस बीमारी को रोकने में अमेरिका में इनका काफी योगदान रहा है।

उन्होंने आगे कहा है कि, " हालांकि मैं इसे साबित नहीं कर सकता लेकिन इसकी अत्यधिक संभावना है।"

उन्होंने अमेरिका के शीर्ष स्वास्थ्य निकाय, रोग नियंत्रण केंद्र (सीडीसी) और रोकथाम की वेबसाइट से एक लिंक साझा करते हुए ट्वीट किया, जिसमें उल्लेख किया गया है कि म्यूकोरमायकोसिस, जानवरों के गोबर में मौजूद है।

इस सीडीसी के अनुसार, "म्यूकोरमायकोसिस, जो फंगस का कारण बनता है, जो पूरे पर्यावरण में मौजूद है, विशेष रूप से मिट्टी, पत्तियों, खाद के ढेर और जानवरों के गोबर जैसे सड़ने वाले कार्बनिक पदार्थों में पाया जाता है।

गौरतलब है कि, समाचार एजेंसी रॉयटर्स द्वारा 12 मई की एक वीडियो रिपोर्ट में कहा गया था कि, गुजरात में कुछ लोग "सप्ताह में एक बार गाय के गोबर और मूत्र सेवन के लिए गौशालाओं में जा रहे हैं। उन्हें विश्वास है कि ऐसा करने से उनकी प्रतिरक्षा को बढ़ावा देगा, या मदद करेगा। और उन्हें कोरोना वायरस महामारी नहीं होगा।

यह भी ध्यान रहे कि गुजरात उन राज्यों में शामिल है, जहां ब्लैक फंगस (म्यूकोरमायकोसिस) के अधिक केस सामने आ रहे हैं। खास कर मधुमेह के मरीजों में। इसके बाद यह बीमारी महाराष्ट्र, दिल्ली, हरियाणा और ओडिशा में भी सामने आए हैं।

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