संसर्गजनित रोगों से निपटने के लिए बीएमसी अस्पताल ने की विशेष व्यवस्था


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मुंबई में मानूसन के मौसम में संसर्गजनित बीमारी (वायरल रोग) में वृद्धि देखने को मिली है। अभी कुछ दिन पहले ही इसी बारिश के चलते लेप्टोस्पायरोसिस बीमारी के कारण 3 लोगों की मौत हो गयी। उसके बाद ऐसी बीमारियों को काबू में करने के लिए अब बीएमसी अस्पतालों ने कमर कस ली है।
 
 
2500 से अधिक बेड की व्यवस्था
विशेष कार्यकारी अधिकारी डॉ. पद्मजा केसकर ने बताया कि मुंबई के सभी सरकारी अस्पतालों में महामारी की बीमारियों से ग्रसित मरीजों के इलाज के लिए 2500 से अधिक बेड की व्यवस्था की गयी है। साथ ही केईएम अस्पताल साथी राजावाड़ी, भाभा सहित अन्य उपनगरीय अस्पतालों में भी जांच के लिए ओपीडी शुरू की गयी है। पिछले साल मलेरिया से 550 मरीज ग्रसित थे जिनकी संख्या इस बार घट कर 380 हो गयी है।  


 300 आरोग्य सेविका 
डॉ. केसकर के मुताबिक संसर्गजनित रोग से ग्रसित मरीजों और उनकी प्राथमिक इलाज के लिए मुंबई के 75 केंद्रों में लगभग 300 की संख्या में आरोग्य सेविका मरीजों की देखभाल के लिए कार्यरत हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि पिछले साल की तुलना में इस बार इस प्रकार की बीमारी में कमी देखने को मिली है। हमारा पूरा प्रयास है कि अभी संख्या में और भी कमी हो।

रखें यह ध्यान
संयुक्त कार्यकारी आरोग्य अधिकारी डॉ. संतोष रेवणकर ने कहा कि बारिश में जल जमाव होने के कारण गैस्ट्रो, मलेरिया, लेप्टो, डेंगू, कॉलरा सहित बीमारी फैलती हैं साथ ही सर्दी, जुखाम, खांसी, वायरल फीवर जैसी भी बीमारी भी फैलती हैं. इसीलिए पानी में नहीं चले और घर में आते ही सबसे पहले साबुन से अच्छी तरह से हाथ पैर धो लें।

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