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आखिर टीका लगवाने के बाद भी क्यों हो रहा है कोरोना, जानें विशेषज्ञों से

कुछ डॉक्टरों का कहना है कि, जितने भी टीके बने हैं किसी की भी इफीसिएंसी 100 फीसदी नहीं है। यानी कोई भी वैक्सीन कोरोना नही होने की 100 फीसदी गारंटी नहीं देता।

आखिर टीका लगवाने के बाद भी क्यों हो रहा है कोरोना, जानें विशेषज्ञों से
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प्राइमरी स्कूल में पढ़ाने वाले मानिक शर्मा ने हाल ही में वैक्सीन (vaccine) की दूसरी डोज ली। कुछ दिन पहले उन्हेंने कोरोना वैक्सीन (corona vaccine) की पहली डोज ली थी। लेकिन पिछले 2-3 दिनों से उन्हें सर्दी, खांसी, जुखाम हो गया था। नॉर्मल दवाई ली, लेकिन ठीक नहीं हुए। परिवार वालों ने कोरोना (coronavirus) की आशंका जताई तो मानिक यह सोच कर कि, उन्होंने तो कोरोना की दोनों डोज ली है, उन्हें कोरोना नहीं हो सकता, इसी लापरवाही में वे रह गए और यहां वहां से सर्दी जुखाम की नॉर्मल दवा लेते रहे। लेकिन जब कुछ दिन बाद उन्हें सांस लेने में भी दिक्कत होने लगी तो उनको कोरोना होने का शक हो गया और उन्होंने अपना कोविड टेस्ट (Covid test) कराया। जिसकी आशंका थी, वही हुआ। रिपोर्ट कोरोना पॉजिटिव आई। अब मानिक बड़े पशोपेश में रह गए कि उन्होंने कोरोना वैक्सीन की दोनों डोज ली थी, तब उन्हें कोरोना कैसे हो गया। यह कहानी केवल मानिक की ही नहीं है बल्कि देश भर से ऐसे कई केस सामने आए। 

इस बारे में डॉक्टरों और विशेषज्ञों की अलग अलग राय है। उनका कहना है कि, शरीर में वैक्सीन अपना कार्य तत्काल शुरु ने करके कुछ दिन बाद करता है। तो ऐसे में यह संभावना जताई जा सकती है कि, शायद पीड़ित वैक्सीन के काम करने से पहले ही पीड़ित हो गया हो।

कुछ डॉक्टरों का कहना है कि, जितने भी टीके बने हैं किसी की भी इफीसिएंसी 100 फीसदी नहीं है। यानी कोई भी वैक्सीन कोरोना नही होने की 100 फीसदी गारंटी नहीं देता।

दूसरी बात यह है कि, वैक्सीन लगाने के बाद कोरोना हो सकता है लेकिन इंसान के कोरोना से मौत होने की आशंका बिल्कुल ही कम हो जाती है।

इसी कड़ी में एक अस्पताल के डायरेक्टर का कहना है कि वैक्सीन कोरोना के प्रभाव को कम काफी कम कर देेता है।

एक स्टडी की मानें तो वैक्सीन लेेनेे बाद वायरस से संक्रमित होने के चांस काफी कम है लेकिन ब्रेकथ्रू केस की संभावना है।

अप्रैल महिने में सेंटर्स फॉर डिजीज कंट्रोल और प्रिवेंशन (center for dieses control and prevention) की छपी रिपोर्ट के मुताबिक, वैक्सीन की दोनों डोज लेने के बाद और दूसरी डोज के 2 हफ्ते बाद 90 फीसदी संक्रमण से बचने की संभावना है, लेकिन इसके बावजूद लोग कोरोना संक्रमित हो रहे हैं। इसका एक प्रमुख कारण है वैक्सीन की डोज गलत तरीके से दिया जाना।

इस बारेे में एक्सपर्ट्स का कहना है कि, अगर वैक्सीन का तापमान सही न रखा जाए या डोज को हाथ के गलत हिस्से में दिया जाए तो फिर से कोरोना से संक्रमित होने की संभावना है।

इसके अलावा कमजोर इम्यून सिस्टम (immunity system) भी इसका एक कारण हो सकता है। तोवहीं वैक्सीन की दूसरी डोज लेने से पहले भी कुछ लोग संक्रमित हो सकते हैं। हालांकि जो लोग वैक्सीन की दूसरी डोज लेने के बाद भी संक्रमित हो रहे हैं उनमें कोरोना के काफी हल्के लक्षण नजर आ रहे हैं।

इसे लेकर आदर पूनावाला (adar poonawala) ने अपनी वैक्सीन कोविशील्ड (Covishield) को लेकर आज तक से कहा कि, 'मैं इसे इसलिए कोविड शील्ड कहता हूं क्योंकि ये एक तरह की शील्ड है जो आपको बीमारी होने से तो नहीं बचाएगा, लेकिन इसकी वजह से आप मरने नहीं वाले हैं। ये आपको गंभीर बीमारी से बचाती है और 95% केसेस में यहां तक कि एक डोज लेने के बाद भी आपको हॉस्पिटल जाने से बचाएगी। जैसे बुलेट प्रूफ जैकेट में होता है, जब आपको गोली लगती है तो आप बुलेट प्रूफ जैकेट की वजह से आप मरते नहीं है लेकिन आपको थोड़ा बहुत डैमेज होता है. जनवरी से अब तक हम करीब 4 करोड़ लोगों को कोरोना वैक्सीन की एक डोज दे चुके हैं, अब हमें ये देखना होगा कि क्या वो अस्पताल में भर्ती हो रहे हैं।'

तो वहीं AIIMS के डायरेक्टर डॉक्टर दीपक गुलेरिया ने कहा, ''वैक्सीन के अलावा हमें और चीजें भी साथ करनी पड़ेगी। अगर हम वैक्सीन लगा दें तो भी कोरोना प्रोटोकॉल पालन करना जरूरी होगा। जैसे-जैसे वायरस बदलेगा तो हो सकता है हमें वैक्सीन भी चेंज करनी पड़े, अगर कोई भी वेरिएंट आएगा और उससे बचना है तो मास्क लगाने से ही बच सकेंगे।''

डॉक्टर गुलेरिया का मानना है कि वैक्सीन कोई सॉल्यूशन नहीं है, इसे लगाने के बाद भी लोग संक्रमित हो सकते हैं। उन्हें नॉर्मल फ्लू जैसी स्थिति हो सकती हैं लेकिन उनकी मौत की संभावना बेहद कम हो जाएगी।

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