बहन ने किडनी देकर बचाई भाई की जान

मरीज ने 2005 में अपना पहला किडनी प्रत्यारोपण कराया था और उसकी पत्नी ने तब किडनी दान की थी। जिसके बाद उसके किडनी ने कुछ महीनों पहले काम करना बंद कर दिया था

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रक्षा बंधन के मौके पर  एक बहन ने अपने भाई को एक एनमोल तोहफा दिया।   61 वर्षीय भाई की जान बचाने के लिए एक बहन ने अपनी किडनी उसे दे दी।    ग्लोबल अस्पताल के डॉक्टरों ने कहा कि मरीज ने 2005 में अपना पहला किडनी प्रत्यारोपण कराया था और उसकी पत्नी ने तब किडनी दान की थी। उनकी किडनी ने इन सभी वर्षों में अच्छा काम किया, लेकिन अब इसने काम करना बंद कर दिया था।

जिसके बाद उनकी बहन ने किरण पांडे नाम के इस  61 वर्षीय बुजुर्ग को अपनी किडनी दी। मुंबई के ग्लोबल हॉस्पिटल के इंस्टीट्यूट ऑफ रीनल साइंसेज के निदेशक डॉ.भरत शाह ने कहा, '' जब मरीज परामर्श के लिए आए तो उन्हे  कई महीनों तक लूज मोशन रहे और उनकी किडनी खराब हो गई। उनके ट्रांसप्लांट की किडनी धीरे-धीरे कम हो गई और उन्हें दूसरे ट्रांसप्लांट की जरूरत थी


मरीज की दो बहनें अपनी एक किडनी भाई को देने के लिए आगे आईं। वास्तव मेंएक बहन दुबई से जांच करने और संभावित दाता होने के लिए आई थी। उनकी दोनों बहनें जिनके रक्त समूह अलग-अलग थेका मूल्यांकन किया गया और ऐसा करने के बाद बहन की किडनी को स्वीकार करने का निर्णय लिया गयाजिसका ऊतक टाइपिंग उसके साथ 100 प्रतिशत मेल खा रहा था।

किरण का ब्लड ग्रुप ओ पॉजिटिव है और उनकी बहन श्रद्धा अवलेगांवकर का (65) एबी पॉजिटिव है। भले ही उनका ब्लड ग्रुप मैच नहीं कर रहा था,लेकिन गेलोबल अस्पताल के डॉक्टरों ने डिसेन्सिटिस प्रक्रिया (प्रत्यारोपण के बाद डोनर के ब्लड ग्रुप को हटानेके बाद ट्रांसप्लांट किया गया। 14 अगस्त 2019 को को किरण पांडे के नई किडनी दी गई।  

श्रद्धा आवलेगांवकर, जिन्होंने अपनी किडनी दान करके अपने भाई के जीवन को बचाने के लिए कई प्रेरणा दी हैं, ने कहा, "मेरे लिए मेरे भाई से ज्यादा महत्वपूर्ण कुछ नहीं है। मैं उसके बिना अपने जीवन की कल्पना नहीं कर सकत। मैंने उसे दर्द में देखा है, और उनके जीवन को बचाने के लिए जो कर सकती थी मैने किया"

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