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फिर बढ़ी 'मेस्मा' की मियांद

अभी हाल ही में सरकारी अस्पतालों में डॉक्टर या फिर नर्सो के हड़ताल पर जाने से मरीजों को अनावश्यक रूप से परेशानी झेलनी पड़ी थी, आगे ऐसा न हो इसीलिए सरकार की तरफ से फिर से 'मेस्मा' लागू कर दिया गया है।

फिर बढ़ी 'मेस्मा' की मियांद
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डॉक्टरों को भगवान का दर्जा दिया जाता है...लेकिन कई मामलों में यही डॉक्टर मरीजों को परेशानी का सबब बन जाते हैं। अभी हाल ही में सरकारी अस्पतालों में डॉक्टर या फिर नर्सो के हड़ताल पर जाने से मरीजों को अनावश्यक रूप से परेशानी झेलनी पड़ी थी, आगे ऐसा न हो इसीलिए सरकार की तरफ से फिर से 'मेस्मा' लागू कर दिया गया है।

मेस्मा की बढ़ी मियांद 
इसके पहले छह महीने के लिए यानी 1 अप्रैल को मेस्मा लागू किया गया था लेकिन छह महीने बाद यानी 1 अक्टूबर को उसकी मियांद समाप्त होने के बाद अब फिर से मेस्मा लागू किया गया है। इसक अंतर्गत अब डॉक्टर, नर्स, कम्पाउंडर, इंटर्न डॉक्टर, टेक्नीशियन या फिर फोर्थ ग्रेड के कर्मचारी हड़ताल पर जाते है तो उनके खिलाफ मेस्मा के अंतर्गत कार्रवाई की जायेगी।

सीधे गिरफ्तारी का है प्रावधान 
महाराष्ट्र इसेंशियल सर्विस ऐंड मेंटिनेंस ऐक्ट (मेस्मा) को महाराष्ट्र आवश्यक सेवा कानून भी कहते हैं। स्वास्थ्य के क्षेत्र में काम करने वालों डॉक्टर से लेकर प्यून तक के हड़ताल करने से मरीजों को होने वाली परेशानी से बचाने के लिए सरकार की तरफ से मेस्मा कानून बनाया गया था। इस कानून के तहत नियमों का उल्लंघन करने पर सीधे गिरफ्तार करने का प्रावधान है।

मेस्मा की मियांद छह महीने के लिए ही होती है। लेकिन इस बार इसे फिर से लागू किया गया है। स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित न हो इसके लिए मेस्मा लागू किया जाता है। अगर किसी को अपनी मांग सरकार के सामने रखनी हो तो वह बैठक के द्वारा, पत्र व्यवहार करके, चर्चा सत्र से अस्पताल प्रशासन से रख सकता है।
- डॉ. प्रविण शिनगारे, संचालक,चिकित्सा शिक्षा और निदेशालय


पढ़ें: सरकारी अस्पतालों में हड़ताल, मरीजों का हाल बेहाल

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