अब 'सुंदरता का राज' होगा गोबर का साबुन!

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अब 'सुंदरता का राज' होगा गोबर का साबुन!
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मुंबई  -  

गाय का दूध, दही और घी हमारी सेहत के लिए अच्छा होता है, इससे तो लगभग लगभग हरकोई वाकिफ है। कुछ लोग गोमूत्र और गोबर के छोटे मोटे उपयोग से भी परिचित होंगे। जैसे पेट की बीमारियों में गोमूत्र का उयोग, गोबर के उपले और खाद बनाना आदि। पर आपने कभी नहीं सोचा होगा कि आप गोबर और गोमूत्र से बने साबुन से स्नान भी कर सकते हैं।  

साबुन, टूथपेस्ट, हैंड वॉश, शेविंग गेल, फेस वॉश, फेशियल, तैल, फ्लोर क्लीनर, शैम्पू धूप, अगरबत्ती आदि। जी हां ये सभी उत्पाद गाय के गोबर और गोमूत्र से बनाए जा रहे हैं।  आयुर्वेद में उल्लेख है कि गाय के गोबर और गौमूत्र से बने उत्पाद लोगों को विविध बीमारियों से बचाते हैं। जिसके चलते लोग इस ओर आकर्षित भी हो रहे हैं।

मुंबई में गाय के पंच तत्व (गोमूत्र, गाय का गोबर, दूध, दही और घी) से इन विविध उत्पादों को बनाने की शुरुआत उमेश सोनी ने की है। उमेश का काऊपैथी नामक स्टोर मुंबई के सी. पी. टैंक में स्थित है। उन्होंने 2012 में इसकी शुरुआत की थी। शुरुआत में गाय के गोबर और गोमूत्र से इन्होंने 5 हजार साबुन बनाए थे, जिसे ग्राहकों का काफी अच्छा प्रतिसाद मिला। जिसके बाद उमेश ने एक एक करके गोबर और गोमूत्र से बने कई सारे उत्पाद बाजार में अतारे। अब देश में तो इनके उत्पाद इस्तेमाल होते ही हैं, 13 दूसरे देशों में भी इनके उत्पाद निर्यात हो रहे हैं।    


गोबर और गोमूत्र की बदबू

आपको लग रहा होगा कि लोग गोबर और गोमूत्र के साबुन और अन्य प्रोडक्ट कैसे उयोग करते होंगे? क्योंकि गोबर और गोमूत्र में बदबू होती है। दरअसर गोबर और गोमूत्र के प्रोडक्ट एक विधी के तहत काऊपैथी तैयार करता है। बनने के बाद आपको समझेगा ही नहीं कि इस प्रोडक्ट में गोबर या गोमूत्र का इस्तेमाल किया गया है।


गोबर को सुखाना और गर्म करना

अगर सोचते हैं कि गोबर को उठाकर सीधे  साबुन या अन्य उत्पाद बना दिए जाते हैं, तो ऐसा नहीं है। गोबर को सबसे पहले सुखाया जाता है, उसके बाद उसे गरम किया जाता है। इस विधि के बाद बदबू गायब हो जाती है। तभी इसका प्रोडक्ट बनाने में इस्तेमाल किया जाता है।


गोमूत्र को उबालना

गोमूत्र को उबाला जाता है, उबलने के बाद जो भाप बनती है उसका इस्तेमाल प्रोडक्ट में बनाने में किया जाता है। साथ ही गोमूत्र को उबालते वक्त जो गोमूत्र बचता है उसे घन कहते हैं और इस घन से बनती है घनबटी, जिसके आयुर्वेद में बहुत सारे उपयोग हैं।  


देशी गाय का गोमूत्र

वैसे तो गोबर देशी गाय का हो या विदेशी दोनों  का उपयोग में लाया जा सकता है, पर गोमूत्र सिर्फ देशी गाय का ही इस्तेमाल किया जा सकता है। इसलिए काऊपैथी ने देशी गाय का गोबर और गोमूत्र खरीदने के लिए के लिए  देश की 12 गोशालाओं से करार किया हुआ है। वे खुद की गोशाला इसलिए नहीं खोलना चाहतें क्योंकि इससे दूसरे लोगों का रोजगार छिन जाएगा।


गाय सोने की मुर्गी

आमतौर पर गाय को लोग तभी तक अपने पास रखते हैं, जब तक वह दूध देती है। जब वह दूध देना बंद कर देती है, तो लोग उसे छोड़ देते हैं। क्योंकि उन्हें लगता है कि अब गाय उनके किसी उपयोग की नहीं रही। पर वे लोग नहीं जानते कि गाय जीवन पर्यंत लाभ देने वाली  उस सोने की मुर्गी की तरह है जो हमेशा सोने के अंडे देती रहती है। दूध नहीं दिया तो क्या हुआ गाय का गोबर और गोमूत्र भी किसी सोने के अंडे से कम है क्या? एक गाय महीने में कमसे कम 8-10 हजार रुपए का गोबर और गोमूत्र देती है।  


गाय देगी जॉब

बस जरूरत है तो देश में इसी तरह की और भी काऊपैथी खोलने की। इसमें सरकार को भी आगे आना होगा। सिर्फ गाय को बोट बैंक समझना गलत है। अगर सरकार काऊपैथी जैसे रोजगार को बढ़ावा देती है, तो जल्द ही लोगों को रोजगार  मिलने लगेगा। साथ ही जो किसान कर्ज के चलते आत्महत्या कर रहे हैं उस पर भी रोक लगाई जा सकेगी। वे गाय काअधिक संख्या में पालन करेंगे।    


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