मिलिंद देवड़ा को मुंबई अध्यक्ष बनाकर एक तीर से तीन निशाना साधा राहुल गांधी ने!


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आपने एक तीर से दो निशान वाली कहावत तो सुनी होगी , लेकिन क्या कभी आपने सुना है की एक तीर से तीन निशान भी लगाया जा सकता है? राजनीति में ऐसा कुछ भी नहीं है जो मुमकिन ना हो , कहते है की राजनिती में ना तो कोई पक्का दोस्त होता है और ना ही कोई पक्का दुश्मन। ऐसे ही राजनीति में एक तीर से एक साथ तीन निशाने भी लगाए जा सकते है। राहुल गांधी ने मिलिंद देवड़ का मुंबई कांग्रेस अध्यक्ष बनाकर ना ही सिर्फ मुंबई कांग्रेस के नेतृत्व को बदला है की बल्की पार्टी के बाकी कद्दावर नेताओ की नाराजगी को भी कम करने से सफलता हासिल की है।

मिलिंद देवड़ा नए मुंबई कांग्रेस अध्यक्ष
मिलिंद देवड़ा को राजनीति में किसी पहचान की कोई जरुरत नहीं है । दो बार के सांसद और केंद्र में मंत्री रहने के साथ साथ राहुल गांधी के करिबियों में भी मिलिंद देवड़ा का नाम आता है। मिलिंद देवड़े के पिता स्वर्गीय मुरली देवड़ा कांग्रेस के वरिष्ठ नेता थे, वह ना ही सिर्फ मुंबई के महापौर थे बल्की मुंबई कांग्रेस अध्यक्ष के साथ साथ केंद्रीय मंत्री भी रहे है। मुरली देवड़ा और सोनिया गांधी के भी राजनीतिक रिश्ते काफी अच्छे रहे है। पिता के कांग्रेस में रहने के कारण मिलिंद को पहले से ही कांग्रेस की राजनिती विरासत में मिली। राहुल गांधी के काफी करिबी होने के कारण कांग्रेस में उनकी हमेशा से ही एक अलग पहचान बनी रही है।

पिछलें कुछ सालों में मुंबई कांग्रेस के अध्यक्ष के रुप में काम कर रहे संजय निरुपम के खिलाफ मुंबई कांग्रेस में काफी गुटबाजी देखी गई। मुंबई कांग्रेस कई गुटों में बट गई। स्वर्गीय गुरुदास कामत से लेकर कृपाशंकर के गुट तक कांग्रेस जमीनी स्तर पर बिखरी दिखी। पार्टी कार्यकर्ताओ ने ही कई बार पार्टी आलाकमान से संजय निरुपम के कार्यपद्धति की शिकायत की, आलम यहां तक हो गया था की कई उम्मीदवारो ने तो लोकसभा चुनाव तक ना लड़ने का फैसला किया था। हालांकी मुंबई कांग्रेस में जीतने भी गुट थे सभी गुट मिलिंद देवड़ा को नया मुंबई अध्यक्ष बनाने के पक्ष में थे। मिलिंद देवड़ा ही इकलौता ऐसा नाम था जिसपर किसी को कोई भी आप्पति नहीं थी। सभी गुट मिलिंद देवड़ा को मुंबई अध्यक्ष के पद पर देने के लिए लगभग तैयार ही थे। लिहाजा राहुल गांधी ने मिलिंद देवड़ा को मुंबई पार्टी अध्यक्ष पद देकर पार्टी के वरिष्ठ नेताओ की नाराजगी को भी दूर किया।

संजय निरुपम को मिली मनचाही सीट
भले ही पूर्व मुंबई कांग्रेस अध्यक्ष संजय निरुपम के नेतृत्व में मुंबई कांग्रेस बटी हुई दिखाई की लेकिन मुंबई अध्यक्ष के तौर पर निरुपम के काम को नकारा नहीं जा सकता है। निरुपम ने पार्टी की कमान उस समय संभाली जब पार्टी राज्य के साथ साथ केंद्र में भी काफी कमजोर हो गई थी। साल 2014 के लोसकभा चुनाव के बाद कांग्रेस को सिर्फ 44 सीटे ही मिली थी , संजय निरुपम खुद अपनी सीट हार गए थे। 2014 के बाद माहौल ऐसा हो गया था की लोग बीजेपी में ही जाने की राह देख रहे थे और कांग्रेस से लोग किनारा ही कर रहे थे। संजय निरुपम ने उस समय मुंबई कांग्रेस की कमान अपने हाथ में ली। भले ले ही राज्य विधानसभा और बीएमसी चुनाव में कांग्रेस कोई खास कमाल ना कर परी हो लेकिन प्रदर्शन और धरनों के जरिए निरुपम ने मुंबई में कांग्रेस का अस्तित्व बनाए रखा।

निरुपम को उनके बोलने के लिए जाना जाता है। निरुपम ने बड़े ही बेबाकी से हर एक प्लेफॉर्म पर पार्टी की राय को खुलकर रखा और मोदी सरकार के साथ साथ राज्य सरकार के खिलाफ जमकर भ्र्ष्टाचार की पोल खोली। हालांकी पिछले बार के लोकसभा चुनाव में हार मिलने के बाद निरुपम इस बार गुरुदास काम की सीट उत्तर पश्चिम से टिकट मांग रहे थे , राहुल गांधी ने भले ही संजय निरुपम को मुंबई कांग्रेस अध्यक्ष पद से हटा दिया हो लेकिन उन्हे मुंबई की उत्तर पश्चिम की सीट देकर उनकी भी नाराजगी को कम कर दिया।

कृपाशंकर सिंह और बाकी नेताओं की भी नाराजगी दूर
पूर्व मुंबई कांग्रेस अध्यक्ष और महाराष्ट्र में कांग्रेस का उत्तर भारतीय चेहरा मानेजानेवाले कृपाशंकर सिंह भी पिछलें कई महीनों से संजय निरुपम को लेकर पार्टी आलाकमान से अपनी नाराजगी जाहीर कर चुके थे। कृपाशंकर सिंह ने पार्टी आलाकमान से कई बार संजय निरुपम के कार्य पद्धति पर सवाल खड़ा करते हुए शिकायत की थी। दरअसल संजय निरुपम के आने के बाद पार्टी में निरुपम को कृपाशंकर सिंह की जगह पर एक और उत्तर भारतीय चेहरे के रुप में देखा जाने लगा। कृपाशंकर सिंह के साथ साथ कई और कांग्रेसी जो काफी पूराने समय से कांग्रेस के साथ थे , उन्होने ने भी अपनी नाराजगी पार्टी आलाकामान से की थी। कृपाशंकर सिंह संजय निरुपम को मुंबई अध्यक्ष के पद पर नहीं पसंद करते। कृपाशंकर के साथ साथ गुरुदास कामत भी निरुपम के कार्यपद्धति के काफी खिलाफ थे। उन्होने ने भी निरुपम के खिलाफ अपना मोर्चा खोल रखा था।


हालांकी कृपाशंकर सिंह को मिलिंद देवड़ा से कोई भी आपत्ति नहीं थी। कृपाशंकर सिंह और मिलिंद देवड़ा के पिता मरली देवड़ा काफी अच्छे दोस्त रहे है। लिहाजा मिलिद देवड़ा को मुंबई अध्यक्ष बनाए जाने पर कृपाशंकर सिंह भी लगभग सहमत ही दिख रहे थे। लिहाजा राहुल गांधी ने मिलिद देवड़ा को मुंबई अध्यक्ष बनाकर , संजय निरुपम को उनके मन की सीट देकर और कृपाशंकर सिंह जैसे वरिष्ठ नेताओं की नाराजगी को भी लगभग दूर कर लिया है।

हार के बाद भी मिलिंद का पलड़ा रहेगा भारी

जहां एक ओर संजय निरुपम को सिर्फ लोकसभा के लिए टिकट दिया गया है तो वही दूसरी  मिलिंद देवड़ा को लोकसभा टिकट के साथ साथ मुंबई कांग्रेस अध्यक्ष भी बनाया गया है , इस लिहाज से अगर संजय निरुपम चुनाव हारते है तो उनके पास करने के लिए कुछ खास नहीं बचेगा ,लेकिन अगर मिलिंद देवड़ा लोकसभा चुनाव हार जाते है तो भी उनके पास मुंबई कांग्रेस अध्यक्ष का पद रहेगा। मुंबई कांग्रेस अध्यक्ष विधानसभा चुनाव और बीएमसी चुनाव के समय टिकट बंटवारे में अहम भूमिका निभाता है। 

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