महाराष्ट्र में कांग्रेस के बड़े भाई का रुतबा खत्म!


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आनेवाले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस और एनसीपी ने 125-125 सीटों पर लड़ने का फैसला किया है। इस सीट बंटवारे में कांग्रेस और एनसीपी दोनों ने ही बराबर सीटों पर चुनाव लड़ने का फैसला किया है।  बाकी के 38 सीटों पर कांग्रेस और एनसीपी अपने सहयोगी पार्टियों को उतारेगी। इस सीट बंटवारे के बाद राज्य में कांग्रेस और एनसीपी के गठबंधन में बड़े भाई के रुप में पहचान बनानेवाली पार्टी कांग्रेस का रुतबा अब काफी कम हो गया है। एक तरफ से कहा जाए तो महाराष्ट्र में अब कांग्रेस बड़ा भाई नहीं रही। 

कभी महाराष्ट्र में कांग्रेस और एनसीपी के गठबंधन में बड़े भाई की भूमिका निभानेवाली कांग्रेस का रुतबा अब कम होता जा रहा है।  कांग्रेस और एनसीपी के गठबंधन में एनसीपी की भूमिका बढ़ती जा रही है।  कांग्रेस का रुतबा सिर्फ महाराष्ट्र में ही नहीं बल्की पूरे देश में कम होता जा रहा है। कांग्रेस के की बड़े नेता पार्टी छोड़कर किसी और पार्टी का दामन थान रहे है।  इसके साथ ही अब कांग्रेस की सीटों पर भी इसका असर पड़ने लगा है।  

क्या था साल 2004 का गणित

वर्ष 2004 के विधानसभा में दोनों पार्टियों ने चुनाव पूर्व गठबंधन किया, तो कांग्रेस 157 और एनसीपी 124 सीट पर चुनाव लड़ी थी। दोनों पार्टियों में 33 सीट का फर्क था। इन चुनाव में एनसीपी को कांग्रेस से दो सीट अधिक मिली, पर एनसीपी ने कांग्रेस को ‘बड़ा भाई' स्वीकार करते हुए गठबंधन सरकार का मुख्यमंत्री बनाया। 

क्या था साल 2009 का गणित

2009 के फॉर्मूले को देखें तो कांग्रेस ने 169 और एनसीपी ने 119 सीटों पर चुनाव लड़ा था।कांग्रेस को 82 सीटें मिले थी तो वही एनसीपी 62 सीटें जीतने में कामयाब हो पाई थी। साल 2014 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस , एनसीपी , बीजेपी और शिवसेना ने अलग अलग चुनाव लड़ा था। हालांकी सीटों के नतीजे आने के बाद बीजेपी और शिवसेना ने साथ में आकर सरकार बना ली। 

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