महाराष्ट्र विधानसभा चुानव- कांग्रेस के आगे एनसीपी ने संभाली कमान!

राज्य में होनेवाले विधानसभा चुुनाव के लिए कांग्रेस , एनसीपी , शिवसेना और बीजेपी ने अपने प्रचार अभियान को और भी तेज किया

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महाराष्ट्र में होनेवाले विधानसभा चुनाव के लिए सभी पार्टियों ने प्रचार बड़े ही जोर शोर से शुरु किया। बीजेपी शिवसेना ने चुनाव प्रचार के लिए पूरी ताकत झोंक दी है। तो वहीं कांग्रेस और एनसीपी ने चुनावी प्रचार अभियान में तेजी लाई है। हालांकी राज्य में जो मौजूदा परिदृश्य देखने को मिल रहा है उसमें बीजेपी शिवसेना के गठबंधन में जहां बीजेपी बड़े भाई की भूमिका में दिख रही है तो वही दूसरी ओर कांग्रेस एनसीपी के गठबंधन में एनसीपी बड़े भाई की भूमिका में नजर आ रही है। राज्य में मौजूदा प्रचार उद्धव ठाकरे , देवेंद्र फड़णवीस , राज ठाकरे और शरद पवार के इर्द गिर्द ही घूमता नजर आ रहा है।

बीजेपी शिवसेना के गठबंधन में दोनों ही पार्टियां बड़े जोरशोर से चुनाव प्रचार कर रही है। शिवसेना पार्टी अध्यक्ष उद्धव ठाकरे और राज्य के मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़णवीस राज्य में घूमघूमकर अपनी अपनी पार्टी के लिए प्रचार कर रहे है।  लेकिन बात अगर कांग्रेस एनसीपी की कि जाए तो कांग्रेस से ज्यादा एनसीपी चुनाव प्रचार करती दिख रही है।  कांग्रेस और एनसीपी का पूरा जोर इस समय एनसीपी पार्टी प्रमुख शरद पवार के आसपास ही घूमता दिख रही है। राज्य में शरद पवार घूमघूम कर चुनाव प्रचार कर रहे है।

एनसीपी की बड़े भाई की भूमिका

साल 2014 का विधानसभा चुनाव राज्य में सभी पार्टियों ने अलग अलग लड़ा था। हालांकी साल 2014 के पहले साल 2009 में हुए विधानसभा चुनाव में कांग्रेस और एनसीपी के गठबंधन में कांग्रेस बड़े भाई की भूमिका निभाती थी लेकिन इस बार के विधानसभा चुनाव में एनसीपी बड़े भाई की भूमिका नजर आ रही है। एनसीपी के पास बीजेपी जीतने स्टार प्रचारक नहीं है बावजूद इसके एनसीपी लगातार राज्य में चुनावी खबरों में सुर्खियों में बनी रहती है। वही दूसरी ओर कांग्रेस का प्रचार काफी ढीला ढाला दिख रहा है।


शरद पवार की राजनीति

महाराष्ट्र की राजनीति में फिलहाल NCP प्रमुख शरद पवार से बड़ा कोई नेता नहीं है।कई बार वह महाराष्ट्र में किंगमेकर की भूमिका में रहे हैं। पश्चिम महाराष्ट्र को शरद पवार का गढ़ माना जाता है। शरद पवार की राजनीति का अंदाजा आप इसी बात से ही लगा सकते ही कि देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पवार को अपना राजनीतिक गुरु बताया है। शरद पवार ने अपना राजनीतिक सफर कांग्रेस के साथ शुरु किया था। 1999 में सोनियां गांधी के अध्यक्ष बनने पर हुए विरोध में कांग्रेस से अलग होने वाले नेताओं में शरद पवार का नाम सबसे ऊपर था।


उन्होंने कांग्रेस से अलग होकर राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी का गठन किया। महाराष्ट्र की राजनीति में उनका कद इतना बड़ा था कि वह प्रदेश में कांग्रेस से अलग होकर न सिर्फ अपना संगठन खड़ा करने में कामयाब रहे बल्कि किंगमेकर की भूमिका में आ गए। यही कारण है कि एमसीपी के गठन के बाद से ही न तो कांग्रेस और ही बीजेपी कभी शरद पवार को नजरअंदाज कर सकी। कांग्रेस इतनी सीटें भी लाने में कामयाब नहीं रही कि एनसीपी के बिना सत्ता में काबिज हो सके।

पश्चिम महाराष्ट्र है शरद पवार का गढ़

2014 के लोकसभा और विधानसभा चुनाव में यहां देश भर में मोदी लहर दिखी। वहीं पश्चिम महाराष्ट्र में मोदी लहर को रोकने में शरद पवार कामयाब रहे। 2014 के लोकसभा चुनाव में राकांपा को मिली सभी चार लोकसभा सीटें इसी इलाके से आई थीं। पांच भागों में बंटे महाराष्ट्र में 2014 और 2019 के लोकसभा चुनाव मेंकोकण, विदर्भ, उत्तर महाराष्ट्र और मराठवाड़ा में भाजपा-शिवसेना गठबंधन 80 फीसद से ज्यादा विधानसभा क्षेत्रों में अपनी बढ़त दिखा चुका है, जबकि पश्चिम महाराष्ट्र ऐसा अकेला भाग था, भाजपा-शिवसेना दो-तिहाई विधानसभा क्षेत्रों से आगे नहीं बढ़ पाईं।


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