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एनसीपी अध्यक्ष शरद पवार ने की केजरीवाल की तारीफ

शरद पवार ने ट्विट कर अरविंद केरजीवाल को जीत के लिए शुभकामनाएं दी।

एनसीपी अध्यक्ष शरद पवार ने की केजरीवाल की तारीफ
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राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के प्रमुख शरद पवार (SHARAD PAWAR)ने मंगलवार को 2020 के दिल्ली विधानसभा चुनावों(ASSEMBLY ELECTION) में अपनी जीत के लिए अरविंद केजरीवाल(ARVIND KEJRIWAL)के नेतृत्व वाली आम आदमी पार्टी (आप) का समर्थन किया। शरद पवार ने ट्विट कर अरविंद केरजीवाल को जीत के लिए शुभकामनाएं दी।  

"परिवर्तन की हवाएं"
संवाददाताओं से बात करते हुए, 79 वर्षीय नेता ने कहा कि दिल्ली विधानसभा चुनावों के परिणामों ने संकेत दिया है कि देश में "परिवर्तन की हवाएं" चल रही हैंयह कहते हुए कि राष्ट्रीय राजधानी(NATIONAL CAPITAL) के लोगों ने भाजपा को खारिज कर दिया है जिन्होंने ध्रुवीकरण(POLARIZATION) करने की कोशिश की थी। उन्होने कहा की "दिल्ली चुनाव के परिणाम मेरे लिए आश्चर्यजनक नहीं हैं। भाजपा ने वोटों का ध्रुवीकरण करने की कोशिश करते हुए सांप्रदायिक कार्ड खेला लेकिन दिल्ली के लोगों ने इसे खारिज कर दिया। यह देश में परिवर्तन की हवाओं की तरफ इशारा करता है"

यह परिणाम अकेले दिल्ली के बारे में नहीं
पवार ने आगे कहा कि देश में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शासन के बावजूद, दिल्ली में हर कोई अरविंद केजरीवाल के बारे में बात कर रहा है। पवार ने कहा कि दिल्ली के लोगों को लगता है कि केजरीवाल ने अपने परिवार और अपने बच्चों की शिक्षा से संबंधित मुद्दों को हल कर लिया है। पवार ने कहा की"“यह परिणाम अकेले दिल्ली के बारे में नहीं है, क्योंकि सभी राज्यों के लोग वहां रहते हैं। जनता आश्वस्त है कि भाजपा देश को संकट में डाल रही है"

एनसीपी सुप्रीमो ने आगे कहा कि बीजेपी को 2019 में महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों में इसी तरह की हार का सामना करना पड़ा और अगले लोकसभा चुनावों में भी उसका सामना करना पड़ेगा।पवार ने कहा की राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में क्या हुआ। मुझे नहीं लगता कि भाजपा के सामने हार का यह सिलसिला अब रुकेगा,”
महाराष्ट्र के उदाहरण का हवाला देते हुए, पवार ने क्षेत्रीय दलों से भाजपा को सत्ता से बाहर रखने के लिए एकजुट होने का आग्रह किया।

महाराष्ट्र मेंशिवसेना ने अपने 35 वर्षीय सहयोगी भाजपा  को सत्ता से बाहर रखने के लिए कांग्रेस और राकांपा के साथ एक वैकल्पिक सरकार बनाई। तीनों दलों ने राज्य में एक स्थिर सरकार बनाने के लिए 'साझा न्यूनतम कार्यक्रम' पर काम किया। अरविंद केजरीवाल तीसरी बार दिल्ली के मुख्यमंत्री चुने गए और AAP ने विधानसभा चुनावों में 62 सीटें जीतीं जबकि भाजपा केवल आठ सीटें ही हासिल कर पाई।

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