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किसी के बोलने पर पिटाई क्यों? लोकतंत्र में सहिष्णुता खो गई है...

जिस तरह से राजनीति अब खूनी हो गई है, और लोगों को अपनी आलोचना सुनना बिल्कुल भी अच्छा नहीं लगता है, वह किसी भी लोकतांत्रिक देश के लिए अच्छा नही है। इसलिए इस परंपरा को बनाये रखना होगा।

किसी के बोलने पर पिटाई क्यों? लोकतंत्र में सहिष्णुता खो गई है...
Pic credit: Deccan cronical
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अभी हाल ही में छत्तीसगढ़ के पंखाजुर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (narendra modi) को लेकर एक वकील ने जिंदाबाद के नारे लगाए, जिसके बाद कांग्रेस कार्यकर्ताओ ने उसकी धुनाई कर दी। यहां दिल्ली में चल रहे किसान आंदोलन के समर्थन में कांग्रेस की रैली हो रही थी, इस दौरान कई कांग्रेसी कार्यकर्ता पीएम मोदी के खिलाफ नारेबाजी कर रहे थे। तभी उन्हीं के बीच इस वकील ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए जिंदाबाद के नारे लगा दिया।

कुछ दिन पहले ही महाराष्ट्र के पंढरपुर जिले में एक BJP नेता को शिवसैनिकों (shivsena) ने स्याही से नहला दिया और उनके साथ मारपीट की। साथ ही उन्हें साड़ी भी पहना दिया था। शिव सेना के कार्यकर्ताओं ने इस BJP नेता पर उद्धव ठाकरे के खिलाफ अभद्र भाषा का इस्तेमाल करने का आरोप लगाया था।

पिछले साल मुंबई (Mumbai) के समता नगर में एक रिटायर्ड नेवी ऑफिसर पर शिवसेना के 6 कार्यकर्ताओं ने मारपीट कर उन्हें घायल कर दिया था। इस नेवी अफसर का कसूर बस इतना सा था कि, उन्होंने उद्धव ठाकरे के एक कार्टून को सोशल मीडिया में फॉरवर्ड किया था।

पिछले साल ही बिहार चुनाव के प्रचार के दौरान बीजेपी कार्यकर्ता और पप्पू यादव की पार्टी के कार्यकर्ता आमने-सामने आ गए। पटना में पप्पू यादव की जन अधिकार पार्टी के कार्यकर्ताओं ने केंद्र की नीतियों के विरुद्ध बीजेपी दफ्तर का घेराव किया। जिसके बाद BJP कार्यकर्ताओं ने पप्पू यादव की पार्टी के कार्यकर्ताओं की जमकर पिटाई कर दी।

इसके अलावा अभी इस समय बंगाल में TMC के कार्यकर्ता जिस तरह से आतंक मचाये हुए हैं, वह किसी से छुपा नहीं है। अभी तक कइयों की जान चली गई है, जिसमें TMC और BJP दोनों कार्यकर्ता शामिल हैं।

इन घटनाओं को देखे तो यह पाते हैं कि, ये सभी घटनाएं राजनीति से प्रेरित हैं। और ये घटनाएं दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र में घट रही हैं। क्या आलोचना करना अब इतना आसान नहीं रह गया है। क्या लोगों में सहिष्णुता समाप्त हो गई है। लोकतंत्र में आलोचना ही सबसे बड़ा गुरु होता है। विपक्ष का काम ही है सत्ता पक्ष के गलत कामों की आलोचना करे। लेकिन शायद अब लोकतंत्र में इतनी स्वस्थ्य राजनीति नहीं रह गयी है।

कुछ साल पहले भारत में सहिष्णुता को लेकर काफी बवाल मचा था। हर जगह सहिष्णुता की बात हो रही थी। जिस तरह से राजनीति अब  खूनी हो गई है, और लोगों को अपनी आलोचना सुनना बिल्कुल भी अच्छा नहीं लगता है, वह किसी भी लोकतांत्रिक देश के लिए अच्छा नही है। इसलिए इस परंपरा को बनाये रखना होगा।

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