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उद्धव सरकार को हुए एक साल, पहले वर्ष की छाया अन्य वर्षों पर न पड़े

उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली सरकार की स्थिरता पर भी एक साल में काफी चर्चाएं हुई। सरकार गठित होते ही केंद्रीय मंत्री नितीन गडकरी समेत भाजपा के कई वरिष्ठ नेताओं ने साफ तौर पर कहा था कि यह सरकार 6 माह से ज्यादा नहीं चल पाएगी,

उद्धव सरकार को हुए एक साल, पहले वर्ष की छाया अन्य वर्षों पर न पड़े
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महाराष्ट्र (maharashtra) की उद्धव ठाकरे (uddhav thackeray) की सरकार ने 28 नवंबर को अपनी स्थापना का एक वर्ष पूरा कर लिया। न्यूनतम साझा कार्यक्रम के तहत 28 अस्तित्व में आई सरकार के एक वर्ष के शासन काल पर नज़र डाली जाए तो महाविकास आघाडी (mva) सरकार ने ऐसा कुछ नहीं किया कि उसकी प्रशंसा की जाए। कोरोना महामारी (corona pandemics) के काल में सरकार के कामकाज पर विपक्ष ने अनेक आरोप लगाए, जबकि सरकार का कहना है उसने एक साल के कार्यकाल में बहुत कुछ किया है।

मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे, उप मुख्यमंत्री अजित पवार (ajit pawar), राकांपा प्रदेशाध्यक्ष जयंत पाटिल (jayant patil), शिवसेना सांसद संजय राऊत (sanjay raut) कह रहे हैं कि महाविकास आघाडी सरकार अपना पांच साल का कार्यकाल पूरा करेगी। दशहरे के मौके पर मुख्यमंत्री ने विपक्ष को ललकारते हुए कहा कि उसमें दम हो तो सरकार गिराकर दिखाये। 

सरकार की एक साल की उपलब्धियों पर नज़र डाली जाए तो इस सरकार ने महात्मा ज्योति बा फुले किसान कर्जमुक्ति योजना के तहत किसानों को 2 लाख रूपए तक रूपए की कर्जमाफी देने की घोषणा की, नगर परिषद् क्षेत्र का विकास करने के लिए एक सदस्यीय प्रभाग पद्धति को अमल में लाया, इतना ही नहीं राज्य के एक लाख गरीब लोगों के लिए 10 रूपए में शिवभोजन योजना शुरु की। इस योजना को कोरोना काल में 5 रूपए कर दिया, इसके अलावा राज्य सरकार ने सरकारी कर्मचारियों के लिए पांच दिन के कामकाज की प्रक्रिया शुरु की।

 महाविकास आघाडी सरकार ने अपने एक साल के कार्यकाल में महपरीक्षा पोर्टल को बंद करके उसके स्थान पर लिखित परीक्षा के माध्यम से भर्ती प्रकिया शुरु की, इसके आलावा राज्य सरकार ने मत्स्यपालन की बढ़ावा देने की योजना बनायी। इतना ही नहीं डीजल की वापसी पर कर्ज की वसूली को रोकने का निर्णय भी इस सरकार ने लिया है।

स्टैंप डियूटी में भी इस सरकार के कटौती की है, इन सबके आलावा सभी भाषिक स्कूलों में मराठी भाषा की अनिवार्यता, इस सरकार के उल्लेखनीय कार्यों की सूची में शामिल हैं, लेकिन चंद उपलब्धियों के बीच बहुत सी बातें ऐसी भी रहीं, जिससे सरकार की किरकिरी भी हुई है। मसलन बेस्ट के कर्मचारियों को वेतन न मिलना, कोरोना काल में आए भारी- भरकम बिजली बिल को माफ करने के वादे को पूरा न करना, अभिनेत्री कंगना राणावत (kangana ranaut) के कार्यालय पर मनपा का बुलडोजर चलवाना, पूर्व नौसैनिक अधिकारी के पिटाई, सुंशात सिंह राजपूत (sushant singh rajput) जांच मामले में मुंबई पुलिस की महज खानापूर्ति जैसे मामलों में सरकार की खूब किरकिरी भी हुई है।

पालघर में तीन साधुओं की हत्या के बाद भी सरकार को निशाने पर लिया गया। कोरोना काल में बिगड़ी आर्थिक स्थिति को सुधारने के लिए जब सरकार ने शराब की दुकानें खोलने का ऐलान किया तो लोगों ने कहा कि उद्धव ठाकरे की सरकार यह क्या कर रही है। स्कूल- कॉलेज खोलने के फैसले पर भी सरकार की आलोचना खूब हुई।

कानून व्यवस्था को लेकर उठते सवालों के बीच राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाने की बात भी खूब जोड़ पकड़ा। पत्रकार अर्णव गोस्वामी की गिरफ्तारी भी चर्चा का विषय बनी। विपक्ष तथा जन आलोचनाओं के बीच सरकार ने अपना एक साल पूरा कर दूसरे वर्ष में प्रवेश कर लिया है। उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली सरकार की स्थिरता पर भी एक साल में काफी चर्चाएं हुई।

सरकार गठित होते ही केंद्रीय मंत्री नितीन गडकरी (nitin gadkari) समेत भाजपा के कई वरिष्ठ नेताओं ने साफ तौर पर कहा था कि यह सरकार 6 माह से ज्यादा नहीं चल पाएगी, लेकिन मार्च माह में जब कोरोना महामारी के कारण पूरे देश में लॉकडॉउन की घोषणा की गई तो महाराष्ट्र सरकार को मानो संजीवनी ही मिल गई। 

केंद्रीय मंत्री तथा भाजपा के पूर्व प्रदेशाध्यक्ष राव साहेव दानवे ने तो कदम आगे बढ़ते हुए कहा है कि राज्य की उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली महाविकास आघाडी की सरकार तीन माह बाद गिर जाएगी। दानवे ने किस आधार पर यह दावा किया है कि वर्तमान सरकार तीन माह में गिर जाएगा, इसका खुलासा किसने भी नहीं किया है। दानवे के दावे पर राकांपा सुप्रिमो शरद पवार ने कटाक्ष करते हुए कहा कि राव साहब दानवे ज्योतिषशास्त्र के भी ज्ञाता है, यह बात मुझे मालूम नहीं थी।

पवार की टिपप्णी पर रावसाहेब दानवे चुप नहीं बैठे और कहा कि मुझ पर टिपप्णी करने का अधिकार शरद पवार को है, उनका नाम महाराष्ट्र ही नहीं देश के वरिष्ठ नेताओं में शुमार है, मैं उनके बारे में क्या बोल सकता हूं, लेकिन मैं इतना जरूर कह सकता हूं कि राज्य की जनता सरकार के प्रसन्न नहीं है। 

राज्य विधानसभा का शीतकालीन अधिवेशन जो इस बार नागपुर की जगह मुंबई में ही हो रहा है। 7 दिसंबर से शुरू हो रहे इस अधिवेशन में भी विपक्ष सरकार को घेरेगा और सरकार विपक्ष हमलों का सामना करेगी। एक मुख्यमंत्री के रूप में पहले एक वर्ष में उद्धव ठाकरे एक अपरिपक्व मुख्यमंत्री के रूप में जरूर सामने आए हैं, लेकिन आने वाले दिनों में उद्धव ठाकरे एक सशक्त मुख्यमंत्री के रूप में सामने आ सकते हैं।

मुख्यमंत्री ने अपनी सरकार के एक वर्ष पूरे होने की पूर्व संध्या पर जो यह ऐलान किया कि अगला चुनाव महाविकास आघाड़ी में शामिल राजनीतिक दल मिलकर लड़ेंगे, इससे इस बात कि आशंका से इंकार नहीं किया जा सकता कि आने वाले दिनो में विपक्ष सरकार के खिलाफ और ज्यादा आक्रामण होगी। 

शह और मात की इस जंग में जीत किसकी होगी यह तो समय बताएगा, लेकिन इतना तय है कि सरकार के लिए पांच साल का कार्यकाल पूरा करना किसी चुनौती से कम नहीं है। एक तरफ शरद पवार, अजित पवार समेत अन्य अनुभवी नेताओं का जमावड़ा है तो दूसरी तरफ देवेंद्र फडणवीस, चंद्रकांत पाटिल के साथ-साथ केंद्र की मोदी सरकार के महारथी हैं, जो यह चाहते हैं कि राज्य की महाविकास आघाड़ी की सरकार जल्दी से जल्दी गिर जाए, लेकिन बरसात के पानी में भीगकर सभा करने वाले शरद पवार यह कत्तई नहीं चाहेंगे कि उनकी मेहनत से अस्तित्व में आई सरकार बीच में ही गिर जाए, इसलिए वे सरकार किसी भी हालत में न गिरे, इसके प्रयास कर रहे हैं, अब देखना यह है कि देवेंद्र फडणवीस (devendra fadnavis) एंड कंपनी अपने लक्ष्य में कामयाब होती है या उद्धव ठाकरे की सरकार पांच सरकार तक चलती है, यह कहने वाले अपने लक्ष्य को पाने में सफल हो पाते हैं।

कुल मिलाकर फिलहाल सरकार यही चाहती है कि जिन स्थितियों का सामना उसे पहले वर्ष में करना पड़ा, वह उसे अपने कार्यकाल के अन्य वर्षों में सहन न करना पड़े और महाविकास आघाडी की सरकार अपना पांच साल का कार्यकाल पूरा करने में सफल हो जाए।


(नोट : यह लेखक के अपने विचार हैं।)

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