अब सस्ती और तेज इंटरनेट का लीजिये मजा, सरकार ने नेट न्यूट्रैलिटी को दी मंजूरी


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भारत सरकार ने लंबी बहस के बाद आखिरकार नेट न्यूट्रैलिटी को मंजूरी दे ही दी। बुधवार को ट्राई द्वारा नेट न्यूट्रैलिटी की सिफ़ारिश करने के बाद गुरुवार को दूरसंचार आयोग ने मंज़ूरी दे दी। अब नेट न्यूट्रैलिटी के सिद्धांत के बाद कोई कंपनी इंटरनेट में कोई भेदभाव नहीं कर पाएगी।


सजा का भी है प्रावधान

इस फैसले के बाद इंटनरेट पर किसी भी सर्विस के लिए एक ही शुल्क लिया जाएगा। इस फैसले के बाद भारतीय इंटरनेट यूजर्स को राहत मिली है। प्राथमिकता के आधार पर किसी रुकावट को भी अपराध माना जाएगा। इसे न मानने वालों पर जुर्माना के साथ साथ सजा का भी प्रावधान है। सरकार का यह कानून मोबाइल ऑपरेटरों, इंटरनेट प्रोवाइडर्स, सोशल मीडिया कंपनियों सब पर लागू होगा। यही नहीं इस फैसले के बाद इंटरनेट सेक्टर में मोनोपोली भी संभव नहीं रह जाएगी। हालांकि सरकार ने रिमोट सर्जरी और स्वचालित कर जैसी कुछ महत्वपूर्ण सेवाओं को नेट न्यूट्रैलिटी नियमों के दायरे से बाहर रखा जाएगा।

नेट न्यूट्रैलिटी के फायदे

पहले टेलिकॉम कंपनियां यूजर्स से अलग-अलग सर्विस के लिए अलग-अलग चार्ज लेती थी लेकिन नेट न्यूट्रैलिटी के आने के बाद कंपनियां हर यूजर से अलग-अलग सर्विसेज के लिए अलग-अलग चार्ज नहीं ले पाएंगी। यही नहीं कंपनियां इंटरनेट की स्पीड को कम भी कर देती थीं लेकिन अब हर वेबसाइट पर समान स्पीड मिलेगी। यही नहीं टेलिकॉम कंपनियां ज्यादा डाटा कंज्यूम करने वाली सर्विसेस को ब्लॉक या स्लो भी नहीं कर पाएंगी। इसके अलावा कंपनियां किसी ऐसी एप के लिए फ्री डाटा नहीं दे पाएंगी जो कंपनी को अलग से पैसे देती है।

दूरसंचार विभाग के अधिकारी सचिव अरुणा सुंदरराजन ने कहा कि दूरसंचार आयोग ने ट्राई की सिफारिशों के आधार पर नेट न्यूट्रैलिटी को मंजूरी दे दी है। हालांकि इसमें कुछ महत्वपूर्ण सेवाओं को इस दायरे से बाहर रखा जा सकता है।

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