
मुंबई में इस साल दिसंबर से वॉटर मेट्रो प्रोजेक्ट शुरू होने की उम्मीद है, जिसका बहुत इंतज़ार था।महाराष्ट्र के पोर्ट्स मिनिस्टर नितेश राणे ने सोमवार, 16 फरवरी को कहा कि यह प्रोजेक्ट कई फेज़ में शुरू होगा, जिसकी शुरुआत शहर के अंदर के खास रूट से होगी और फिर इसे बड़े मुंबई मेट्रोपॉलिटन रीजन (MMR) तक बढ़ाया जाएगा।(Mumbai water metro likely to roll out in phases from December 2026)
मेट्रो प्रोजेक्ट में बैटरी से चलने वाली फेरी शुरू करने का प्लान
मुंबई वॉटर मेट्रो प्रोजेक्ट में बैटरी से चलने वाली फेरी शुरू करने का प्लान है, जिसका मकसद मेट्रोपोलिस और उसके आस-पास के इलाकों में ट्रैफिक की भीड़ को कम करना है।राणे ने कहा कि MMR में वॉटर मेट्रो पर एक डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट (DPR) उनके डिपार्टमेंट द्वारा 28 फरवरी तक जमा किए जाने की उम्मीद है।
वॉटर टैक्सी प्रोजेक्ट के तहत MMR में छह से आठ रूट बनाए
राज्य सरकार ने वॉटर टैक्सी प्रोजेक्ट के तहत MMR में छह से आठ रूट बनाए हैं, जिन्हें बिजली से चलने वाली नावों के नेटवर्क से जोड़ा जाएगा, जिसकी अनुमानित लागत 1,200 करोड़ है।राणे ने कहा कि केरल के कोच्चि वॉटर मेट्रो की तरह इस प्रोजेक्ट के बारे में ऑफिशियल अनाउंसमेंट फडणवीस 6 मार्च को होने वाले राज्य बजट में करेंगे।
मुंबई वॉटर मेट्रो के रूट:
राज्य सरकार ने वॉटर ट्रांसपोर्ट नेटवर्क के लिए MMR में छह से आठ रूट की पहचान की है, जिनमें से दो रूट पहले फेज़ में लॉन्च किए जाने की उम्मीद है। मुंबई शहर के अंदर, फोकस नरीमन पॉइंट–वर्ली–बांद्रा–जुहू–वर्सोवा जैसे हाई-ट्रैफिक कोस्टल हिस्सों पर होगा।
उन्होंने कहा कि DPR जमा होने के बाद रूट की फीजिबिलिटी पर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के साथ बातचीत की जाएगी। फाइनल किए गए दो रूट को पहले लागू करने के लिए लिया जाएगा।
एक बार जब साउथ मुंबई में गेटवे ऑफ इंडिया के पास रेडियो क्लब जेट्टी तैयार हो जाएगी, तो वॉटर मेट्रो लोगों को नवी मुंबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट तक ले जाने में सिर्फ 40 मिनट लेगी।
सर्विस प्लान
वॉटर मेट्रो शहरी आवागमन के लिए डिजाइन की गई मॉडर्न इलेक्ट्रिक फेरी का इस्तेमाल करके चलेगी। इन नावों से हर ट्रिप में लगभग 50 से 100 पैसेंजर के आने-जाने की उम्मीद है।
इस सर्विस को समय बचाने वाला और इको-फ्रेंडली ऑप्शन मानकर प्लान किया जा रहा है। अधिकारियों का मानना है कि इससे मुंबई की भीड़भाड़ वाली सड़कों और सबअर्बन रेल नेटवर्क पर दबाव काफी कम हो जाएगा।
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