पाइरेसी करने पर 3 साल की सजा, 10 लाख जुर्माना

केंद्रीय मंत्रालय ने पाइरेसी को रोकने के लिए सिनेमैटोग्राफी एक्ट 1952 में संवैधानिक संशोधन को मंजूरी दे दी है।

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पिछले कुछ समय से फिल्म निर्माताओ और कलाकारों के लिए पायरेसी एक बड़ी समस्या बन गई है। पायरेसी के कारण सिनेमाघरों की कमाई के पर काफी असर पड़ता है। फिल्म निर्माताओं ने भी कई बार लोगों से पाइरेटेड फिल्म ना देखने की अपील की है। सरकार ने भी अब ओर एक अदम कदम उठाया है।

केंद्रीय मंत्रालय ने पाइरेसी को रोकने के लिए सिनेमैटोग्राफी एक्ट 1952 में संवैधानिक संशोधन को मंजूरी दे दी है। इस कानून में संसोधन के बाद अब पाईरेसी करने पर 3 साल तक की सजा हो सकती है।

पाइरेसी के खिलाफ केंद्र सरकार की भूमिका
ठाकरे ’ मनकर्णिका’ और अनिल कपूर की ‘एक लडकी को देखा तो ऐसा लगा' की पाईरेसी होने के कारण फिल्म को काफी नुकसान उठाना पड़ा था। इसके पहले भी कई फिल्मो की प्राइरेसी हो चुकी है। पाइरेसी को लेकर कई फिल्म निर्माताओ और कलाकारो ने सरकार से इसकी शिकायत भी की थी। सरकार ने अब इस मामले में कानून को और भी कड़ा कर दिया है।

तीन साल की कैद और दस लाख जुर्माना
पाइरेसी करनेवालों को कम से कम तीन साल की सजा या 10 लाख रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा। संबंधित उत्पादकों की अनुमति के बिना रिकॉर्डिंग या प्रसारण करना भी अपराध है। केंद्र सरकार के फैसले का प्रोड्युसर गिल्ड एसोसिएशन ने स्वागत किया है।

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