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मुंबई पुलिस की हॉर्न से संबंधित इस पहल का ऋतिक रोशन ने किया समर्थन, हॉर्न बजाने के गिनाए नुकसान

ऋतिक ने अपने सोशल मीडिया पर एक लंबा भावपूर्ण नोट शेयर करते हुए लिखा,हमारे प्रोग्रामिंग में यह एक सांस्कृतिक कमी है, जब बेवजह हॉर्न बजाने की बात आती है। यह शायद कुछ गलत मान्यताओं के संयोजन के कारण होता है।

मुंबई पुलिस की हॉर्न से संबंधित इस पहल का ऋतिक रोशन ने किया समर्थन, हॉर्न बजाने के गिनाए नुकसान
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ऋतिक रोशन ने हाल ही में अपने सोशल मीडिया पर एक ऐसे मुद्दे पर दिल खोलकर लिखा है, जो हम सभी को प्रभावित करता है। ऋतिक ने नेट सर्फिंग करने के दौरान एक वीडियो देखा और एक जिम्मेदार नागरिक के रूप में, उन्होंने लगातार हॉर्न बजाने की समस्या को कम करने के लिए मुंबई पुलिस द्वारा उठाए गए कदम की सरहाना की है। उन्होंने एक लंबा नोट लिखा है जो यह दर्शाता हैं कि वह पहल के लिए क्या महसूस करते हैं।

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There is a cultural deficit in our programming when it comes to mindless honking. It probably is caused by a combination of certain wrong beliefs . We assume that the other people in traffic are not as much in a hurry as us. Which is certainly incorrect . We all want to get to where we are going sooner rather than later . So why do we we honk? Not needed. . We believe that honking will magically make the traffic move faster or turn the red light green sooner somehow . It will not . . We also honk because we can see that the pedestrians never follow the rules and that becomes the general belief system - because we secretly know that we ourselves don’t follow the rules while crossing the streets and cross sections. . And we are so comfortable with the noise pollution because we are accustomed to it. Which is really sad. But easily reversible . Plus blowing that horn has become a kind of mindless venting of all our daily irritations and frustrations , it gives us some kind of satisfaction that we are letting off some steam . It actually does the opposite. The noise only aggravates all that pent up irritation inside . It does not HELP it. . I am dreaming of a mumbai that is more patient , more trusting , more aware , more giving , more disciplined , more responsible , more present and all that will only come from wanting to be better as individual citizens for the sake of our city . Let’s do things together which will make us even more proud of this magnificent city. My secret suspicion is that just the act of being aware of NOT to blow that horn will make us more present and add peace and serenity to our days wether inside or outside the car. . You cannot dream of peace with decibels at its peak. Patience is the solution to our chaos . As a proud Mumbaikar, I volunteer to minimize noise pollution. This movement by the mumbai police is just such a brilliant initiative. And #HornMoreWaitMore is a creative hack by our Traffic Controllers. 💪🏻 . P.S : I am posting this as a citizen who was impacted by this video I saw yesterday and this post is not a tie up or endorsement... but my own personal thoughts and emotions .

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वीडियो में बताया गया है कि मुंबई पुलिस ने किस तरह से हॉर्न बजाने की समस्या को कम करने के लिए एक व्यावहारिक रणनीति बनाई है - एक ट्रैफिक लाइट सिस्टम जो कार के हॉर्न की आवाज 85 डीबी तक पहुंच जाने पर लाल बत्ती को रीसेट कर देता है, इसलिए पहल का नाम #HonkMaWaitMore रखा गया है।

ऋतिक ने अपने सोशल मीडिया पर एक लंबा भावपूर्ण नोट शेयर करते हुए लिखा,हमारे प्रोग्रामिंग में यह एक सांस्कृतिक कमी है, जब बेवजह हॉर्न बजाने की बात आती है। यह शायद कुछ गलत मान्यताओं के संयोजन के कारण होता है। हमें लगता हैं कि ट्रैफिक में अन्य लोग उतनी जल्दी में नहीं हैं जितना कि हम हैं। जो निश्चित रूप से गलत है। हम सभी चाहते हैं कि हम बाद में जाने की बजाए जल्द से जल्द वहां पहुंच जाएं। तो हम हॉर्न क्यों बजाते हैं? इसकी जरूरत नहीं है।

हमें लगता है कि लगातार हॉर्न बजाने से ट्रैफिक तेजी से आगे बढ़ने लगेगा या फिर लाल बत्ती जल्दी से हरी हो जाएगी। ऐसा नहीं होगा। हम हॉर्न इसलिए भी बजाते हैं, क्योंकि हम देख सकते हैं कि पैदल यात्री कभी भी नियमों का पालन नहीं करते हैं और यह सामान्य विश्वास प्रणाली बन जाती है, क्योंकि हम कहीं ना कहीं यह जानते हैं कि हम खुद सड़क और क्रॉस-सेक्शन को पार करते समय नियमों का पालन नहीं करते हैं। और हम ध्वनि प्रदूषण के साथ इतने सहज हैं क्योंकि हम इसके आदी हैं। जो वास्तव में दुखद है। लेकिन आसानी से प्रतिवर्ती है।

इसके अलावा, हॉर्न बजाना हमारे सभी दैनिक चिड़चिड़ापन और गुस्से को बाहर निकालने का जरिया बन गया है, जो हमें एक तरह की संतुष्टि देता है। हालांकि, असल में इसका विपरीत होता है। शोर केवल हमारे अंदर के गुस्से को बढ़ाता है जो अंदर जलन पैदा करता है। यह मदद नहीं करता है। 

मैं एक ऐसे मुंबई का सपना देख रहा हूं जो अधिक धैर्यवान, अधिक भरोसेमंद, अधिक जागरूक, अधिक उधार, अधिक अनुशासित, अधिक जिम्मेदार, अधिक प्रेजेंट और वह सब है जो केवल हमारे शहर की खातिर व्यक्तिगत नागरिक के रूप में बेहतर होने के साथ आएगा। आइए एक साथ मिलकर काम करते है जिससे हमें इस शानदार शहर पर अधिक गर्व होगा।

मेरा गुप्त संदेह यह है कि हॉर्न न बजाने के प्रति जागरूकता ही, हमारे दिनों को अधिक शांत और सुखमय बना देगी चाहे फिर हम कार के अंदर हों या बाहर। डेसिबल को ऊपर जाता देखकर, आप शांति का सपना नहीं देख सकते। धैर्य हमारी अराजकता का हल है।

एक गर्वित मुंबईकर के रूप में, मैं ध्वनि प्रदूषण को कम करने के लिए स्वयंसेवक हूं। मुंबई पुलिस द्वारा किया गया यह आंदोलन एक शानदार पहल है।और #HornMoreWaitMore हमारे ट्रैफिक कंट्रोलरों द्वारा एक रचनात्मक हैक है।

ऋतिक ने लिखा,कृपया  ध्यान दें, मैं इसे एक नागरिक के रूप में पोस्ट कर रहा हूं, जिसे मैंने कल देखा था और इस वीडियो से प्रभावित महसूस कर रहा था और यह पोस्ट कोई टाई-अप या एंडोर्समेंट नहीं है, बल्कि मेरे अपने व्यक्तिगत विचार और भावनाएं हैं।

मुंबई निश्चित रूप से काफी हद तक ट्रैफिक की समस्या का सामना करती है और ऋतिक ने इसे कलमबद्ध करते हुए, एक खूबसूरत वीडियो शेयर किया है जो सभी को प्रभावित करता है। वीडियो एक संदेश के साथ समाप्त होता है 'यदि आपको प्रतीक्षा करने में कोई आपत्ति नहीं है तो आप बेझिझक हॉर्न बजा सकते हैं' और यही वीडियो में हाइलाइट किया गया है।

फिल्मो की बात करें तो, ऋतिक ने 2019 में दो बैक टू बैक हिट दी है और 'वॉर' उनकी अब तक का सबसे अधिक कमाई करने वाली फिल्म बन गई है। दर्शक अब उनकी अगली फिल्म का इंतजार कर रहे हैं। 

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