बिक गया RK स्टूडियो, गोदरेज ने खरीदा

16 सितंबर 2016 में जब इस स्टूडियो में आग लगी थी, तो यहां काफी नुकसान हो गया था। तभी से ही कपूर खानदान ने इस ऐतासिहिक धरोहर को बेचने का निर्णय ले लिया था।

SHARE

हिंदी सिनेमा के इतिहास में कई एतिहासिक फिल्मों का निर्माण कर चुका आर.के फिल्म स्टूडियो (RK Films and Studio) को बेच दिया गया। इस स्टूडियो को खरीदा है गोदरेज गोदरेज समूह की फर्म गोदरेज प्रॉपर्टीज ने। 16 सितंबर 2016 में जब इस स्टूडियो में आग लगी थी, तो यहां काफी नुकसान हो गया था। तभी से ही कपूर खानदान ने इस ऐतासिहिक धरोहर को बेचने का निर्णय ले लिया था।

अब इस स्टूडियो को जब गोदरेज प्रॉपर्टीज ने खरीद लिया है, लेकिन अभी तक उनकी तरफ से डील की वैल्यू के बारें में कोई खुलासा नहीं किया गया है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार इस बारे में बात करते हुए रणधीर कपूर ने कहा कि, 'चेंबुर की यह प्राॅपर्टी कई दशकों से हमारे परिवार की एक पहचान थी। अब हमने गोदरेज प्राॅपर्टीज को इसका नया इतिहास बनाने के लिए चुना है।'

गोदरेज समूह की तरफ से भी इस डील पर पुष्टि की गयी है। समूह के कार्यकारी चेयरमैन फिरोजशाह गोदरेज ने बताया कि, कंपनी के  चेंबूर के इस ऐतिसाहिक धरोहर को कंपनी ने अपने पोर्टफोलियो मे शामिल किया है।इस स्टूडियो की 33 हजार वर्ग मीटर (2.2 एकड़) जमीन का इस्तेमाल लग्जरी फ्लैट और रिटेल स्पेस बनाने में किया जाएगा।  

आपको बता दें कि मशहूर दिवंगत अभिनेता राज कपूर ने 1948 में RK स्टूडियो की नींव रखी थी। इस स्टूडियो में उन्होंने कई ऐसी फिल्मों का निर्माण किया जो बेहद सफल रही हैं, जिसमें बरसात (1949), आवारा (1951), बूट पॉलिश (1954), श्री 420 (1955), जागते रहो (1956), जिस देश में गंगा बहती है (1960), 'मेरा नाम जोकर' (1970), बॉबी (1973), सत्यम शिवम सुंदरम (1978), प्रेम रोग (1982) और राम तेरी गंगा मैली (1985) जैसी फिल्में शामिल हैं।  RK स्टूडियो ने साल 1999 में अपनी अंतिम फिल्म 'आ अब लौट चलें' का निर्माण किया था। इस स्टूडियो से आम लोगों का भी काफी भावनात्मक लगाव रहा है। यही नहीं बंद होने के बाद भी यहां कपूर खानदान हर साल गणेश चतुर्थी का उत्सव इस स्टूडियो में मनाया करता था।

संबंधित विषय