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स्कूल लीविंग सर्टिफिकेट उम्र का सबूत नहीं - बॉम्बे हाई कोर्ट


स्कूल लीविंग सर्टिफिकेट उम्र का सबूत नहीं - बॉम्बे हाई कोर्ट
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बॉम्बे हाई कोर्ट ने एक मामले में अहम फैसला सुनाया है कि ‘स्कूल लीविंग सर्टिफिकेट’ को उम्र का पक्का सबूत नहीं माना जा सकता।साथ ही, इसी आधार पर POCSO केस के आरोपी को ज़मानत मिल गई है। 25 साल के एक युवक पर पीड़ित लड़की से रेप करने का आरोप है।(A School Leaving Certificate is not proof of age)

आरोपी को ज़मानत

हालांकि, कोर्ट ने कहा कि दोनों के बीच लव अफेयर की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। जस्टिस आर. एम. जोशी की सिंगल बेंच ने यह फैसला सुनाया और आरोपी को ज़मानत दे दीआरोपी युवक 25 साल का था और लड़की 15 साल की। उनके बीच लव अफेयर था। आरोपी पीड़ित लड़की को अपनी बहन से मिलवाने के बहाने घर ले गया।

2022 से आरोपी जेल में था बंद 

यह भी आरोप है कि पीड़ित लड़की को वहां एक फ्लैट में रखा गया और उसके साथ रेप किया गया। पीड़ित लड़की के इस बारे में बयान देने के बाद, आरोपी का मेडिकल टेस्ट कराया गया।साथ ही, आरोपी जयेश पारधी को 10 अगस्त, 2022 को गिरफ्तार किया गया था। वह तब से जेल में है। उसने जमानत के लिए एंड के ज़रिए हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। अर्

वसई (वसई रोड) के वालिव पुलिस स्टेशन में POCSO एक्ट के तहत केस दर्ज किया गया था। आरोपी की बेल एप्लीकेशन पर जस्टिस आर. एम. जोशी की सिंगल बेंच ने सुनवाई की।

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