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महाराष्ट्र के प्राचीन परंपराओं के मुताबिक मंदिरों में शिशुओं को दूध पिलाने के लिए अलग से 'जननी कक्ष' बनाया जाता था। उसी परंपरा को फिर से जीवित करने का प्रयास अब बीजेपी की महिला नगरसेवक आशा मराठे कर रही हैं। आशा मराठे ने मांग की है कि बीएमसी मुख्यालय के विभिन्न विभागों के कार्यालयों में भी महिलाओं के लिए जननी कक्ष बनाया जाए।


क्यों है आवश्यक?

आशा मराठे ने प्रस्ताव पेश कर यह मांग की कि बीएमसी मुख्यालय में आम लोगों से जुड़े अनेक कार्य होते हैं। इनमे टैक्स जमा करने, जन्म-मृत्यु और विवाह प्रमाण पत्र प्राप्त करने के साथ साथ अनेक कार्य भी होते हैं। इन कार्यों के लिए अनेक महिलाएं भी अपने दूधमुंहे बच्चे के साथ आती हैं और जब भूख से बच्चा रोता है तो बच्चों को स्तनपान करने के लिए महिलाओं को दिक्ततों का सामना करना पड़ता है। इसीलिए विभिन्न विभागों में जननी कक्ष बनाए जाना चाहिए।

 उन्होंने कहा इससे आने वाली महिला आंगतुकों को समस्या से निजात तो मिलेगी ही साथ ही कार्यरत अनेक महिलाएं भी इसका लाभ उठा सकेंगी।

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